॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: आलिंगन करना, गले लगाना
संस्कृत: परिष्वङ्गे
अंग्रेज़ी: to hug,to embrace
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | स्वजते | स्वजेते | स्वजन्ते |
| मध्यम | स्वजसे | स्वजेथे | स्वजध्वे |
| उत्तम | स्वजे | स्वजावहे | स्वजामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): स्वजते · लिट् (आत्मने.): सस्वजे · लुट् (आत्मने.): स्वङ्क्ता · लृट् (आत्मने.): स्वङ्क्ष्यते · लोट् (आत्मने.): स्वजताम् · लङ् (आत्मने.): अस्वजत · विधिलिङ् (आत्मने.): स्वजेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): स्वङ्क्षीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अस्वङ्क्त · लृङ् (आत्मने.): अस्वङ्क्ष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: स्वञ्जन · ण्वुल्: स्वञ्जकः · तृच्: स्वङ्क्ता · ण्यत्: स्वञ्ज्यः · तव्य: स्वङ्क्तव्यः · अनीयर्: स्वञ्जनीयः · क्त: स्वक्तः · क्तवतु: स्वक्तवान् · शानच्: स्वजमानः · क्त्वा: स्वक्त्वा · ल्यप्: प्रस्वज्य · तुमुन्: स्वङ्क्तुम् · णमुल्: स्वञ्जम् · घञ्: स्वङ्गः · क्तिन्: स्वक्ति · क्वसु: सस्वज्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| स्वजते | स्वञ्ज् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: स्वजता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: स्वज + तल् (भाववाचक) | स्वजता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · तद्धित: स्वज + तल् (भाववाचक) |
स्वजते ➤ आलिंगन करना, गले लगाना
संस्कृत: परिष्वङ्गे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड