॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: स्पर्धा करना, बड़ावरी करना, बुलाना, पुकारना
संस्कृत: स्पर्धायां शब्दे च
अंग्रेज़ी: to vie with,to challenge,to compete, to call, to invoke
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ह्वयति | ह्वयतः | ह्वयन्ति |
| मध्यम | ह्वयसि | ह्वयथः | ह्वयथ |
| उत्तम | ह्वयामि | ह्वयावः | ह्वयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: ह्वयति · लट् (आत्मने.): ह्वयते · लिट्: जुहाव · लिट् (आत्मने.): जुहुवे · लुट्: ह्वाता · लुट् (आत्मने.): ह्वाता · लृट्: ह्वास्यति · लृट् (आत्मने.): ह्वास्यते · लोट्: ह्वयतात् · लोट् (आत्मने.): ह्वयताम् · लङ्: अह्वयत् · लङ् (आत्मने.): अह्वयत · विधिलिङ्: ह्वयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): ह्वयेत · आशीर्लिङ्: हूयात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): ह्वासीष्ट · लुङ्: अह्वत् · लुङ् (आत्मने.): अह्वत · लृङ्: अह्वास्यत् · लृङ् (आत्मने.): अह्वास्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: ह्वान · ण्वुल्: ह्वायकः · तृच्: ह्वाता · यत्: ह्वेयः · तव्य: ह्वातव्यः · अनीयर्: ह्वानीयः · क्त: हूतः · क्तवतु: हूतवान् · शतृ: ह्वयन् · स्य-शतृ: ह्वास्यन् · शानच्: ह्वयमानः · क्त्वा: हूत्वा · ल्यप्: प्रहूय · तुमुन्: ह्वातुम् · णमुल्: ह्वायम् · क्तिन्: हूति · क्वसु: जुहूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| ह्वयति | ह्वे धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: ह्वयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: ह्वे + शतृ | ह्वयत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: ह्वे + शतृ |
ह्वयति ➤ स्पर्धा करना, बड़ावरी करना, बुलाना, पुकारना
संस्कृत: स्पर्धायां शब्दे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड