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📜 लघुसिद्धान्तकौमुदी

वरदराजाचार्य कृत · पाणिनीय सूत्र, मूल वृत्ति, हिन्दी अनुवाद एवं सरल व्याख्या

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२७. कण्ड्वादयः

कण्ड्वादि · सूत्र 726–726 (1)
७२६ विधिसूत्रम् अष्टा० 3.1.27
कण्ड्वादिभ्यो यक् ॥
अनुवृत्ति/अधिकार: प्रत्ययः, परश्च, आद्युदात्तश्च, धातोः
वृत्तिः
एभ्यो धातुभ्यो नित्यं यक् स्यात्स्वार्थे । ॥ 〔धातु 1: कण्डूञ् — गात्रविघर्षणे〕॥ कण्डूयति । कण्डूयत इत्यादि ॥ इति कण्ड्वादयः ॥
हिन्दी अनुवाद
कण्डू आदि (धातुओं) से स्वार्थ में नित्य यक् होता है। (धातु 1) कण्डूञ् — शरीर खुजलाना: कण्डूयति, कण्डूयते इत्यादि। (कण्ड्वादि समाप्त।)
सरल व्याख्या
कण्डूयति (खुजलाता है) — ये धातु-भी हैं और संज्ञा-भी, इनमें सदा 'य' लगता है।

मूल पाठ: लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य) — डिजिटल पाठ-स्रोत ashtadhyayi.com · हिन्दी अनुवाद व सरल व्याख्या: cdsharma.in

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