उण् आदि प्रत्यय वर्तमान काल और संज्ञा में बहुलता से होते हैं; कुछ अविहित भी अनुमान से जानने चाहिए। (कारिका) संज्ञा-शब्दों में धातु-रूप और उनके बाद प्रत्यय (पहचानें), और कार्य से अनुबन्ध (इत्) को जानें — यह उणादि में शास्त्र (रीति) है। (उणादि समाप्त।)
सरल व्याख्या
कारु, वायु, साधु, गुरु जैसे शब्द 'उणादि' प्रत्ययों से बने हैं — इनकी व्युत्पत्ति शब्द देखकर अनुमान से की जाती है। (प्रकरण-भूमिका में 'उण्' के उदाहरण दिए गए हैं।)