🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 08:17:03 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

ईजते

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

ईजते

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

ईजते

अर्थ: जाना, दोष लगाना, निन्दा करना

संस्कृत: गतिकुत्सनयोः

अंग्रेज़ी: to go, to blame,to censure,to condemn, to insult, to ridicule, to revile, to criticise

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. ईज् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — ईज् (भ्वादिगण) · अर्थ: जाना, दोष लगाना, निन्दा करना (गतिकुत्सनयोः)

लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमईजतेईजेतेईजन्ते
मध्यमईजसेईजेथेईजध्वे
उत्तमईजेईजावहेईजामहे

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): ईजते · लिट् (आत्मने.): ईजाञ्चक्रे · लुट् (आत्मने.): ईजिता · लृट् (आत्मने.): ईजिष्यते · लोट् (आत्मने.): ईजताम् · लङ् (आत्मने.): ऐजत · विधिलिङ् (आत्मने.): ईजेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): ईजिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): ऐजिष्ट · लृङ् (आत्मने.): ऐजिष्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: ईजन · ण्वुल्: ईजकः · तृच्: ईजिता · ण्यत्: ईज्यः · तव्य: ईजितव्यः · अनीयर्: ईजनीयः · क्त: ईजितः · क्तवतु: ईजितवान् · शानच्: ईजमानः · क्त्वा: ईजित्वा · ल्यप्: प्रेज्य · तुमुन्: ईजितुम् · णमुल्: ईजम् · घञ्: ईगः · क्तिन्: ईक्ति · क्वसु: ईजाम्बभूवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
ईजतेईज् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

ईजते ➤ जाना, दोष लगाना, निन्दा करना
संस्कृत: गतिकुत्सनयोः

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
💬 ज्योतिषीय प्रश्न पूछें