॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: कृत्य, कार्य, कर्म
संस्कृत: क्रिया · पर्याय: क्रिया, कृत्या, लीला
व्युत्पत्ति: कृ-मनिन् (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कर्म | कर्मणी | कर्माणि |
| द्वितीया | कर्म | कर्मणी | कर्माणि |
| तृतीया | कर्मणा | कर्मभ्याम् | कर्मभिः |
| चतुर्थी | कर्मणे | कर्मभ्याम् | कर्मभ्यः |
| पञ्चमी | कर्मणः | कर्मभ्याम् | कर्मभ्यः |
| षष्ठी | कर्मणः | कर्मणोः | कर्मणाम् |
| सप्तमी | कर्मणि | कर्मणोः | कर्मसु |
| सम्बोधन | हे कर्मन् / हे कर्म | हे कर्मणी | हे कर्माणि |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कर्म | कर्मन् (नपुं.) — सम्बोधन, एकवचन अन्य सम्भावना: कर्मन् (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन | कर्मन् (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन |
कर्म ➤ कृत्य, कार्य, कर्म
संस्कृत: क्रिया · पर्याय: क्रिया, कृत्या, लीला
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| कर्मन् |
क्रिया (३.२.१) — क्रिया क्रिया के नौ अर्थ (३.३.१६५) — आरम्भ, प्रायश्चित्त, शिक्षा, पूजा, विचार, उपाय, चेष्टा, चिकित्सा |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड