🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 08:23:53 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

काङ्क्षति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

काङ्क्षति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

काङ्क्षति

अर्थ: चाहना, इच्छा करना

संस्कृत: काङ्क्षायाम्

अंग्रेज़ी: to desire, to long for, to wish

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. काङ्क्ष् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. काङ्क्षत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: काङ्क्ष् + शतृ
  3. काङ्क्षत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: काङ्क्ष् + शतृ
  4. काङ्क्षता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: काङ्क्ष् + घञ् · तद्धित: काङ्क्ष + तल् (भाववाचक)

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — काङ्क्ष् (भ्वादिगण) · अर्थ: चाहना, इच्छा करना (काङ्क्षायाम्)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकाङ्क्षतिकाङ्क्षतःकाङ्क्षन्ति
मध्यमकाङ्क्षसिकाङ्क्षथःकाङ्क्षथ
उत्तमकाङ्क्षामिकाङ्क्षावःकाङ्क्षामः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: काङ्क्षति · लिट्: चकाङ्क्ष · लुट्: काङ्क्षिता · लृट्: काङ्क्षिष्यति · लोट्: काङ्क्षतात् · लङ्: अकाङ्क्षत् · विधिलिङ्: काङ्क्षेत् · आशीर्लिङ्: काङ्क्ष्यात् · लुङ्: अकाङ्क्षीत् · लृङ्: अकाङ्क्षिष्यत्

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: काङ्क्षण · ण्वुल्: काङ्क्षकः · तृच्: काङ्क्षिता · ण्यत्: काङ्क्ष्यः · तव्य: काङ्क्षितव्यः · अनीयर्: काङ्क्षणीयः · क्त: काङ्क्षितः · क्तवतु: काङ्क्षितवान् · शतृ: काङ्क्षन् · स्य-शतृ: काङ्क्षिष्यन् · क्त्वा: काङ्क्षित्वा · ल्यप्: प्रकाङ्क्ष्य · तुमुन्: काङ्क्षितुम् · णमुल्: काङ्क्षम् · घञ्: काङ्क्षः · क्तिन्: कांष्टि · क्वसु: चकाङ्क्ष्वान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
काङ्क्षतिकाङ्क्ष् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: काङ्क्षत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: काङ्क्ष् + शतृ | काङ्क्षत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: काङ्क्ष् + शतृ

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

काङ्क्षति ➤ चाहना, इच्छा करना
संस्कृत: काङ्क्षायाम्

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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