॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: पूजा करना, जानना, समझना
संस्कृत: पूजानिशामनयोः
अंग्रेज़ी: to worship, to know, to understand
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चायति | चायतः | चायन्ति |
| मध्यम | चायसि | चायथः | चायथ |
| उत्तम | चायामि | चायावः | चायामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: चायति · लट् (आत्मने.): चायते · लिट्: चचाय · लिट् (आत्मने.): चचाये · लुट्: चायिता · लुट् (आत्मने.): चायिता · लृट्: चायिष्यति · लृट् (आत्मने.): चायिष्यते · लोट्: चायतात् · लोट् (आत्मने.): चायताम् · लङ्: अचायत् · लङ् (आत्मने.): अचायत · विधिलिङ्: चायेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): चायेत · आशीर्लिङ्: चाय्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): चायिषीष्ट · लुङ्: अचायीत् · लुङ् (आत्मने.): अचायिष्ट · लृङ्: अचायिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अचायिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: चायन · ण्वुल्: चायकः · तृच्: चायिता · ण्यत्: चाय्यः · तव्य: चायितव्यः · अनीयर्: चायनीयः · क्त: चायितः · क्तवतु: चायितवान् · शतृ: चायन् · स्य-शतृ: चायिष्यन् · शानच्: चायमानः · क्त्वा: चायित्वा · ल्यप्: प्रचाय्य · तुमुन्: चायितुम् · णमुल्: चायम् · घञ्: चायः · क्तिन्: चाति · क्वसु: चचिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| चायति | चाय् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: चायत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: चाय् + शतृ | चायत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: चाय् + शतृ |
चायति ➤ पूजा करना, जानना, समझना
संस्कृत: पूजानिशामनयोः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड