॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: चमकना, प्रकाशित होना, क्रीड़ा करना, खेलना
संस्कृत: दीप्तिदेवनयोः
अंग्रेज़ी: to glow, to shine,to play
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | छृणत्ति | छृन्तः / छृन्त्तः | छृन्दन्ति |
| मध्यम | छृणत्सि | छृन्त्थः / छृन्थः | छृन्त्थ / छृन्थ |
| उत्तम | छृणद्मि | छृन्द्वः | छृन्द्मः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: छृणत्ति · लट् (आत्मने.): छृन्ते · लिट्: चच्छर्द · लिट् (आत्मने.): चच्छृदे · लुट्: छर्दिता · लुट् (आत्मने.): छर्दिता · लृट्: छर्त्स्यति · लृट् (आत्मने.): छर्त्स्यते · लोट्: छृणत्तु · लोट् (आत्मने.): छृन्ताम् · लङ्: अच्छृणत् · लङ् (आत्मने.): अच्छृन्त · विधिलिङ्: छृन्द्यात् · विधिलिङ् (आत्मने.): छृन्दीत · आशीर्लिङ्: छृद्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): छर्दिषीष्ट · लुङ्: अच्छर्दीत् · लुङ् (आत्मने.): अच्छर्दिष्ट · लृङ्: अच्छर्त्स्यत् · लृङ् (आत्मने.): अच्छर्त्स्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: छर्दन · ण्वुल्: छर्दकः · तृच्: छर्दिता · तव्य: छर्दितव्यः · अनीयर्: छर्दनीयः · क्त: छृण्णः · क्तवतु: छृण्णवान् · शतृ: छृन्दन् · स्य-शतृ: छर्त्स्यन् · शानच्: छृन्दानः · क्त्वा: छृत्त्वा · ल्यप्: प्रच्छृद्य · तुमुन्: छर्दितुम् · णमुल्: छर्दम् · घञ्: छर्दः · क्तिन्: छृत्ति · क्वसु: चच्छृद्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| छृणत्ति | छृद् धातु (रुधादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन |
छृणत्ति ➤ चमकना, प्रकाशित होना, क्रीड़ा करना, खेलना
संस्कृत: दीप्तिदेवनयोः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड