॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बोलना
संस्कृत: भाषायाम्
अंग्रेज़ी: to speak, to talk
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जयति / जाययति | जयतः / जाययतः | जयन्ति / जाययन्ति |
| मध्यम | जयसि / जाययसि | जयथः / जाययथः | जयथ / जाययथ |
| उत्तम | जयामि / जाययामि | जयावः / जाययावः | जयामः / जाययामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: जयति · लट् (आत्मने.): जाययते · लिट्: जाययाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): जाययाञ्चक्रे · लुट्: जयिता · लुट् (आत्मने.): जाययिता · लृट्: जयिष्यति · लृट् (आत्मने.): जाययिष्यते · लोट्: जयतात् · लोट् (आत्मने.): जाययताम् · लङ्: अजयत् · लङ् (आत्मने.): अजाययत · विधिलिङ्: जयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): जाययेत · आशीर्लिङ्: जाय्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): जाययिषीष्ट · लुङ्: अजायीत् · लुङ् (आत्मने.): अजीजयत · लृङ्: अजयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अजाययिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: जयन · ण्वुल्: जायकः · तृच्: जयिता · यत्: जेयः · तव्य: जयितव्यः · अनीयर्: जयनीयः · क्त: जियितः · क्तवतु: जियितवान् · शतृ: जयन् · स्य-शतृ: जयिष्यन् · शानच्: जाययमानः · क्त्वा: जयित्वा · ल्यप्: प्रजित्य · तुमुन्: जयितुम् · णमुल्: जायम् · क्तिन्: जिति · क्वसु: जिजिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जयति | जि धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: जि धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | जयता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: जय + तल् (भाववाचक) |
जयति ➤ बोलना
संस्कृत: भाषायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड