॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: संरक्षण करना, मुक्त करना
संस्कृत: रक्षणे मोक्षणे च
अंग्रेज़ी: to protect,to release
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | दंहति / दंहयति | दंहतः / दंहयतः | दंहन्ति / दंहयन्ति |
| मध्यम | दंहयसि / दंहसि | दंहथः / दंहयथः | दंहथ / दंहयथ |
| उत्तम | दंहयामि / दंहामि | दंहयावः / दंहावः | दंहयामः / दंहामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: दंहति · लट् (आत्मने.): दंहयते · लिट्: दंहयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): दंहयाञ्चक्रे · लुट्: दंहयिता · लुट् (आत्मने.): दंहयिता · लृट्: दंहयिष्यति · लृट् (आत्मने.): दंहयिष्यते · लोट्: दंहतात् · लोट् (आत्मने.): दंहयताम् · लङ्: अदंहत् · लङ् (आत्मने.): अदंहयत · विधिलिङ्: दंहयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): दंहयेत · आशीर्लिङ्: दंह्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): दंहयिषीष्ट · लुङ्: अदंहीत् · लुङ् (आत्मने.): अददंहत · लृङ्: अदंहयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अदंहयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: दंहन · ण्वुल्: दंहकः · तृच्: दंहिता · यत्: दंह्यः · ण्यत्: दंह्यः · तव्य: दंहितव्यः · अनीयर्: दंहनीयः · क्त: दंहितः · क्तवतु: दंहितवान् · शतृ: दंहन् · स्य-शतृ: दंहिष्यन् · शानच्: दंहयमानः · क्त्वा: दंहित्वा · ल्यप्: प्रदंह्य · तुमुन्: दंहितुम् · णमुल्: दंहम् · घञ्: दंहः · क्तिन्: दङ्ग्धि · क्वसु: ददंह्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| दंहति | दंह् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: दंहत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दंह् + शतृ | दंहत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दंह् + शतृ |
दंहति ➤ संरक्षण करना, मुक्त करना
संस्कृत: रक्षणे मोक्षणे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड