॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: काटना, कतराना
संस्कृत: लवने
अंग्रेज़ी: to cut
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लङ् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अदात् / अदाद् | अदाताम् | अदान् / अदुः |
| मध्यम | अदाः | अदातम् | अदात |
| उत्तम | अदाम् | अदाव | अदाम |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: दाति · लिट्: ददौ · लुट्: दाता · लृट्: दास्यति · लोट्: दातात् · लङ्: अदात् · विधिलिङ्: दायात् · आशीर्लिङ्: दायात् · लुङ्: अदासीत् · लृङ्: अदास्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: दान · ण्वुल्: दायकः · तृच्: दाता · यत्: देयः · तव्य: दातव्यः · अनीयर्: दानीयः · क्त: दातः · क्तवतु: दातवान् · शतृ: दान् · स्य-शतृ: दास्यन् · क्त्वा: दात्वा · ल्यप्: प्रदाय · तुमुन्: दातुम् · णमुल्: दायम् · घञ्: दायः · क्तिन्: दाति · क्वसु: ददिवान्
अर्थ: खोदना, सताना, दुख देना, स्थिर रहना (कर्तृवाचक कृदन्त)
संस्कृत: खदने
अंग्रेज़ी: to dig, to irritate, to cause pain, to be steady
व्युत्पत्ति: खर्व्+ड+टाप्
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका 📘 धातु-रूपावली में सभी लकार
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | खाः | खौ | खाः |
| द्वितीया | खाम् | खौ | खः |
| तृतीया | खा | खाभ्याम् | खाभिः |
| चतुर्थी | खे | खाभ्याम् | खाभ्यः |
| पञ्चमी | खः | खाभ्याम् | खाभ्यः |
| षष्ठी | खः | खोः | खाम् |
| सप्तमी | खि | खोः | खासु |
| सम्बोधन | हे खाः | हे खौ | हे खाः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | खायति | खायतः | खायन्ति |
| मध्यम | खायसि | खायथः | खायथ |
| उत्तम | खायामि | खायावः | खायामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: खायति · लिट्: चखौ · लुट्: खाता · लृट्: खास्यति · लोट्: खायतात् · लङ्: अखायत् · विधिलिङ्: खायेत् · आशीर्लिङ्: खायात् · लुङ्: अखासीत् · लृङ्: अखास्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: खान · ण्वुल्: खायकः · तृच्: खाता · यत्: खेयः · तव्य: खातव्यः · अनीयर्: खानीयः · क्त: खातः · क्तवतु: खातवान् · शतृ: खायन् · स्य-शतृ: खास्यन् · क्त्वा: खात्वा · ल्यप्: प्रखाय · तुमुन्: खातुम् · णमुल्: खायम् · घञ्: खायः · क्तिन्: खाति · क्वसु: चखिवान्
अर्थ: विशेषण और क्रिया - विशेषणों से पूर्व प्रयुक्त होने वाला उपसर्ग - बहुत, अधिक, अतिशय, अत्यधिक उत्कर्ष को भी यह शब्द प्रकट करता है
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
अव्यय — इसके रूप विभक्ति/वचन से नहीं बदलते।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| दुः | दा धातु (अदादिगण, परस्मैपद) — लङ् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन (माङ्योग में अट्-आगम का अभाव — न माङ्योगे) अन्य सम्भावना: अव्ययम् | दो धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लुङ् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन (माङ्योग में अट्-आगम का अभाव — न माङ्योगे) |
| खे | खा (पुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: खै + अच् अन्य सम्भावना: खा (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन | खा (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, द्विवचन |
| अति | अव्ययम् |
दुः ➤ काटना, कतराना
संस्कृत: लवने
खे ➤ खोदना, सताना, दुख देना, स्थिर रहना (कर्तृवाचक कृदन्त)
संस्कृत: खदने
अति ➤ विशेषण और क्रिया - विशेषणों से पूर्व प्रयुक्त होने वाला उपसर्ग - बहुत, अधिक, अतिशय, अत्यधिक उत्कर्ष को भी यह शब्द प्रकट करता है
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
| पदम् | विच्छेदः | सन्धि | सूत्रम् |
|---|---|---|---|
| दुःखयति | खे + अति | अयादि | एचोऽयवायावः (६.१.७८) |
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड