॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: धिक्कार करना, तिरस्कार करना
संस्कृत: न्यक्करणे
अंग्रेज़ी: to hate, to despise,to disfigure, to condemn
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | द्यायति | द्यायतः | द्यायन्ति |
| मध्यम | द्यायसि | द्यायथः | द्यायथ |
| उत्तम | द्यायामि | द्यायावः | द्यायामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: द्यायति · लिट्: दद्यौ · लुट्: द्याता · लृट्: द्यास्यति · लोट्: द्यायतात् · लङ्: अद्यायत् · विधिलिङ्: द्यायेत् · आशीर्लिङ्: द्यायात् · लुङ्: अद्यासीत् · लृङ्: अद्यास्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: द्यान · ण्वुल्: द्यायकः · तृच्: द्याता · यत्: द्येयः · तव्य: द्यातव्यः · अनीयर्: द्यानीयः · क्त: द्यानः · क्तवतु: द्यानवान् · शतृ: द्यायन् · स्य-शतृ: द्यास्यन् · क्त्वा: द्यात्वा · ल्यप्: प्रद्याय · तुमुन्: द्यातुम् · णमुल्: द्यायम् · घञ्: द्यायः · क्तिन्: द्याति · क्वसु: दद्यिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| द्यायति | द्यै धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: द्यायत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: द्यै + शतृ | द्यायत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: द्यै + शतृ |
द्यायति ➤ धिक्कार करना, तिरस्कार करना
संस्कृत: न्यक्करणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड