॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: याचना करना, रोगी होना, श्रीमान् होना, आशीर्वाद देना
संस्कृत: याच्ञोपतापैश्वर्याशीष्षु
अंग्रेज़ी: to seek help, to beg, to irritate, to bless, to master
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नाथति | नाथतः | नाथन्ति |
| मध्यम | नाथसि | नाथथः | नाथथ |
| उत्तम | नाथामि | नाथावः | नाथामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: नाथति · लट् (आत्मने.): नाथते · लिट्: ननाथ · लिट् (आत्मने.): ननाथे · लुट्: नाथिता · लुट् (आत्मने.): नाथिता · लृट्: नाथिष्यति · लृट् (आत्मने.): नाथिष्यते · लोट्: नाथतात् · लोट् (आत्मने.): नाथताम् · लङ्: अनाथत् · लङ् (आत्मने.): अनाथत · विधिलिङ्: नाथेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): नाथेत · आशीर्लिङ्: नाथ्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): नाथिषीष्ट · लुङ्: अनाथीत् · लुङ् (आत्मने.): अनाथिष्ट · लृङ्: अनाथिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अनाथिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: नाथन · ण्वुल्: नाथकः · तृच्: नाथिता · ण्यत्: नाथ्यः · तव्य: नाथितव्यः · अनीयर्: नाथनीयः · क्त: नाथितः · क्तवतु: नाथितवान् · शतृ: नाथन् · स्य-शतृ: नाथिष्यन् · शानच्: नाथमानः · क्त्वा: नाथित्वा · ल्यप्: प्रनाथ्य · तुमुन्: नाथितुम् · णमुल्: नाथम् · घञ्: नाथः · क्तिन्: नात्ति · क्वसु: ननाथ्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| नाथति | नाथ् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: नाथता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: नाथ + तल् (भाववाचक) | नाथत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: नाथ् + शतृ |
नाथति ➤ याचना करना, रोगी होना, श्रीमान् होना, आशीर्वाद देना
संस्कृत: याच्ञोपतापैश्वर्याशीष्षु
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड