॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: निन्दा करना, दोष लगाना
संस्कृत: कुत्सायाम्
अंग्रेज़ी: to blame,to censure,to condemn, to insult, to ridicule, to revile, to criticise
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | निन्दति | निन्दतः | निन्दन्ति |
| मध्यम | निन्दसि | निन्दथः | निन्दथ |
| उत्तम | निन्दामि | निन्दावः | निन्दामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: निन्दति · लिट्: निनिन्द · लुट्: निन्दिता · लृट्: निन्दिष्यति · लोट्: निन्दतात् · लङ्: अनिन्दत् · विधिलिङ्: निन्देत् · आशीर्लिङ्: निन्द्यात् · लुङ्: अनिन्दीत् · लृङ्: अनिन्दिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: निन्दन · ण्वुल्: निन्दकः · तृच्: निन्दिता · ण्यत्: निन्द्यः · तव्य: निन्दितव्यः · अनीयर्: निन्दनीयः · क्त: निन्दितः · क्तवतु: निन्दितवान् · शतृ: निन्दन् · स्य-शतृ: निन्दिष्यन् · क्त्वा: निन्दित्वा · ल्यप्: प्रणिन्द्य · तुमुन्: निन्दितुम् · णमुल्: निन्दम् · घञ्: निन्दः · क्तिन्: निन्ति · क्वसु: निनिन्द्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| निन्दति | निन्द् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: निन्दत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: निन्द् + शतृ | निन्दता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: निन्द् + घञ् · तद्धित: निन्द + तल् (भाववाचक) |
निन्दति ➤ निन्दा करना, दोष लगाना
संस्कृत: कुत्सायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड