॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: उद्योग करना, व्यवहार करना, प्रशंसा करना, स्तुति करना
संस्कृत: व्यवहारे स्तुतौ च
अंग्रेज़ी: to deal, to transact, to do business, to barter, to praise
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पणायति | पणायतः | पणायन्ति |
| मध्यम | पणायसि | पणायथः | पणायथ |
| उत्तम | पणायामि | पणायावः | पणायामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: पणायति · लट् (आत्मने.): पणते · लिट्: पणायाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): पेणे · लुट्: पणायिता · लुट् (आत्मने.): पणिता · लृट्: पणायिष्यति · लृट् (आत्मने.): पणिष्यते · लोट्: पणायतात् · लोट् (आत्मने.): पणताम् · लङ्: अपणायत् · लङ् (आत्मने.): अपणत · विधिलिङ्: पणायेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): पणेत · आशीर्लिङ्: पणाय्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पणिषीष्ट · लुङ्: अपणायीत् · लुङ् (आत्मने.): अपणिष्ट · लृङ्: अपणायिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अपणिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पणन · ण्वुल्: पाणकः · तृच्: पणिता · यत्: पणाय्यः · ण्यत्: पाण्यः · तव्य: पणितव्यः · अनीयर्: पणनीयः · क्त: पणितः · क्तवतु: पणितवान् · शतृ: पणायन् · स्य-शतृ: पणायिष्यन् · शानच्: पणमानः · क्त्वा: पणित्वा · ल्यप्: प्रपण्य · तुमुन्: पणितुम् · णमुल्: पाणम् · घञ्: पाणः · क्तिन्: पाण्टि · क्वसु: पेणिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पणायति | पण् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: पणायता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: पणाय + तल् (भाववाचक) | पणायत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पण् + शतृ |
पणायति ➤ उद्योग करना, व्यवहार करना, प्रशंसा करना, स्तुति करना
संस्कृत: व्यवहारे स्तुतौ च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड