॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: ढेर करना, राशि करना
संस्कृत: सङ्घाते
अंग्रेज़ी: to heap, to pile up, to gather
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पिण्डते | पिण्डेते | पिण्डन्ते |
| मध्यम | पिण्डसे | पिण्डेथे | पिण्डध्वे |
| उत्तम | पिण्डे | पिण्डावहे | पिण्डामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): पिण्डते · लिट् (आत्मने.): पिपिण्डे · लुट् (आत्मने.): पिण्डिता · लृट् (आत्मने.): पिण्डिष्यते · लोट् (आत्मने.): पिण्डताम् · लङ् (आत्मने.): अपिण्डत · विधिलिङ् (आत्मने.): पिण्डेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पिण्डिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अपिण्डिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अपिण्डिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पिण्डन · ण्वुल्: पिण्डकः · तृच्: पिण्डिता · ण्यत्: पिण्ड्यः · तव्य: पिण्डितव्यः · अनीयर्: पिण्डनीयः · क्त: पिण्डितः · क्तवतु: पिण्डितवान् · शानच्: पिण्डमानः · क्त्वा: पिण्डित्वा · ल्यप्: प्रपिण्ड्य · तुमुन्: पिण्डितुम् · णमुल्: पिण्डम् · घञ्: पिण्डः · क्तिन्: पिण्टि · क्वसु: पिपिण्ड्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पिण्डते | पिण्ड् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: पिण्डत् (नपुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पिण्ड् + शतृ | पिण्डत् (पुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: पिण्ड् + शतृ |
पिण्डते ➤ ढेर करना, राशि करना
संस्कृत: सङ्घाते
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड