॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: धारण करना, पालन करना
संस्कृत: धारणे
अंग्रेज़ी: to wear, to obey
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पोषति / पोषयति | पोषतः / पोषयतः | पोषन्ति / पोषयन्ति |
| मध्यम | पोषयसि / पोषसि | पोषथः / पोषयथः | पोषथ / पोषयथ |
| उत्तम | पोषयामि / पोषामि | पोषयावः / पोषावः | पोषयामः / पोषामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: पोषति · लट् (आत्मने.): पोषयते · लिट्: पुपोष · लिट् (आत्मने.): पोषयाञ्चक्रे · लुट्: पोषयिता · लुट् (आत्मने.): पोषयिता · लृट्: पोषयिष्यति · लृट् (आत्मने.): पोषयिष्यते · लोट्: पोषतात् · लोट् (आत्मने.): पोषयताम् · लङ्: अपोषत् · लङ् (आत्मने.): अपोषयत · विधिलिङ्: पोषयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): पोषयेत · आशीर्लिङ्: पुष्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): पोषयिषीष्ट · लुङ्: अपूपुषत् · लुङ् (आत्मने.): अपूपुषत · लृङ्: अपोषयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अपोषयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: पोषण · ण्वुल्: पोषकः · तृच्: पोषिता · यत्: पोष्यः · ण्यत्: पोष्यः · तव्य: पोषितव्यः · अनीयर्: पोषणीयः · क्त: पुषितः · क्तवतु: पुषितवान् · शतृ: पोषन् · स्य-शतृ: पोषिष्यन् · शानच्: पोषयमाणः · क्त्वा: पुषित्वा · ल्यप्: प्रपुष्य · तुमुन्: पोषितुम् · णमुल्: पोषम् · घञ्: पोषः · क्तिन्: पुष्टि · क्वसु: पुपुष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पोषति | पुष् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: पुष् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | पोषता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: पोष + तल् (भाववाचक) |
पोषति ➤ धारण करना, पालन करना
संस्कृत: धारणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड