॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: विस्तार करना, फैलाना, जावना
संस्कृत: प्रख्याने
अंग्रेज़ी: to expand scope, to spread
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | प्राथयति | प्राथयतः | प्राथयन्ति |
| मध्यम | प्राथयसि | प्राथयथः | प्राथयथ |
| उत्तम | प्राथयामि | प्राथयावः | प्राथयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: प्राथयति · लट् (आत्मने.): प्राथयते · लिट्: प्राथयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): प्राथयाञ्चक्रे · लुट्: प्राथयिता · लुट् (आत्मने.): प्राथयिता · लृट्: प्राथयिष्यति · लृट् (आत्मने.): प्राथयिष्यते · लोट्: प्राथयतात् · लोट् (आत्मने.): प्राथयताम् · लङ्: अप्राथयत् · लङ् (आत्मने.): अप्राथयत · विधिलिङ्: प्राथयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): प्राथयेत · आशीर्लिङ्: प्राथ्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): प्राथयिषीष्ट · लुङ्: अपप्रथत् · लुङ् (आत्मने.): अपप्रथत · लृङ्: अप्राथयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अप्राथयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: प्राथन · ण्वुल्: प्राथकः · तृच्: प्राथयिता · यत्: प्राथ्यः · तव्य: प्राथयितव्यः · अनीयर्: प्राथनीयः · क्त: प्राथितः · क्तवतु: प्राथितवान् · शतृ: प्राथयन् · स्य-शतृ: प्राथयिष्यन् · शानच्: प्राथयमानः · क्त्वा: प्राथयित्वा · ल्यप्: प्रप्राथ्य · तुमुन्: प्राथयितुम् · णमुल्: प्राथम् · क्तिन्: प्रात्ति · क्वसु: प्राथयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| प्राथयति | प्रथ् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: प्रथ् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | प्राथयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: प्रथ् + शतृ |
प्राथयति ➤ विस्तार करना, फैलाना, जावना
संस्कृत: प्रख्याने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.४ सेकण्ड