॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: हिन्दी अर्थ उपलब्ध नहीं
संस्कृत: गतिप्रेरणश्लेषणेषु
अंग्रेज़ी: to go,to inspire, to send,to touch,to hug, to embrace
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | प्रैणति | प्रैणतः | प्रैणन्ति |
| मध्यम | प्रैणसि | प्रैणथः | प्रैणथ |
| उत्तम | प्रैणामि | प्रैणावः | प्रैणामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: प्रैणति · लिट्: पिप्रैण · लुट्: प्रैणिता · लृट्: प्रैणिष्यति · लोट्: प्रैणतात् · लङ्: अप्रैणत् · विधिलिङ्: प्रैणेत् · आशीर्लिङ्: प्रैण्यात् · लुङ्: अप्रैणीत् · लृङ्: अप्रैणिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: प्रैणन · ण्वुल्: प्रैणकः · तृच्: प्रैणिता · ण्यत्: प्रैण्यः · तव्य: प्रैणितव्यः · अनीयर्: प्रैणनीयः · क्त: प्रैणितः · क्तवतु: प्रैणितवान् · शतृ: प्रैणन् · स्य-शतृ: प्रैणिष्यन् · क्त्वा: प्रैणित्वा · ल्यप्: प्रप्रैण्य · तुमुन्: प्रैणितुम् · णमुल्: प्रैणम् · घञ्: प्रैणः · क्तिन्: प्रैण्टि · क्वसु: पिप्रैण्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| प्रैणति | प्रैण् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: प्रैणत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: प्रैण् + शतृ | प्रैणत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: प्रैण् + शतृ |
प्रैणति ➤ to go,to inspire, to send,to touch,to hug, to embrace (अंग्रेज़ी कोश)
संस्कृत: गतिप्रेरणश्लेषणेषु
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड