॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: भजना, भजन करना
संस्कृत: सेवायाम्
अंग्रेज़ी: to worship,to honour,to pray, to serve
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भजति | भजतः | भजन्ति |
| मध्यम | भजसि | भजथः | भजथ |
| उत्तम | भजामि | भजावः | भजामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: भजति · लट् (आत्मने.): भजते · लिट्: बभाज · लिट् (आत्मने.): भेजे · लुट्: भक्ता · लुट् (आत्मने.): भक्ता · लृट्: भक्ष्यति · लृट् (आत्मने.): भक्ष्यते · लोट्: भजतात् · लोट् (आत्मने.): भजताम् · लङ्: अभजत् · लङ् (आत्मने.): अभजत · विधिलिङ्: भजेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): भजेत · आशीर्लिङ्: भज्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): भक्षीष्ट · लुङ्: अभाक्षीत् · लुङ् (आत्मने.): अभक्त · लृङ्: अभक्ष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अभक्ष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भजन · ण्वुल्: भाजकः · तृच्: भक्ता · ण्यत्: भाज्यः · तव्य: भक्तव्यः · अनीयर्: भजनीयः · क्त: भक्तः · क्तवतु: भक्तवान् · शतृ: भजन् · स्य-शतृ: भक्ष्यन् · शानच्: भजमानः · क्त्वा: भक्त्वा · ल्यप्: प्रभज्य · तुमुन्: भक्तुम् · णमुल्: भाजम् · घञ्: भागः · क्तिन्: भक्ति · क्वसु: भेजिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भजति | भज् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: भजत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भज् + शतृ | भजत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भज् + शतृ |
भजति ➤ भजना, भजन करना
संस्कृत: सेवायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड