॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: शुभ कर्म करना, सुखी होना
संस्कृत: कल्याणे सुखे च
अंग्रेज़ी: to be prosperous, to be glad, to be happy
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भन्दते | भन्देते | भन्दन्ते |
| मध्यम | भन्दसे | भन्देथे | भन्दध्वे |
| उत्तम | भन्दे | भन्दावहे | भन्दामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): भन्दते · लिट् (आत्मने.): बभन्दे · लुट् (आत्मने.): भन्दिता · लृट् (आत्मने.): भन्दिष्यते · लोट् (आत्मने.): भन्दताम् · लङ् (आत्मने.): अभन्दत · विधिलिङ् (आत्मने.): भन्देत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): भन्दिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अभन्दिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अभन्दिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भन्दन · ण्वुल्: भन्दकः · तृच्: भन्दिता · ण्यत्: भन्द्यः · तव्य: भन्दितव्यः · अनीयर्: भन्दनीयः · क्त: भन्दितः · क्तवतु: भन्दितवान् · शानच्: भन्दमानः · क्त्वा: भन्दित्वा · ल्यप्: प्रभन्द्य · तुमुन्: भन्दितुम् · णमुल्: भन्दम् · घञ्: भन्दः · क्तिन्: भन्ति · क्वसु: बभन्द्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भन्दते | भन्द् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: भन्दता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भन्द् + घञ् · तद्धित: भन्द + तल् (भाववाचक) | भन्दता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: भन्द् + घञ् · तद्धित: भन्द + तल् (भाववाचक) |
भन्दते ➤ शुभ कर्म करना, सुखी होना
संस्कृत: कल्याणे सुखे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड