॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: प्रकाश, कान्ति चमक
संस्कृत: सूर्यः, किरणः · पर्याय: सूर, सूर्य, अर्यमन्, आदित्य, द्वादशात्मन्
व्युत्पत्ति: भा+नु
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भानुः | भानू | भानवः |
| द्वितीया | भानुम् | भानू | भानून् |
| तृतीया | भानुना | भानुभ्याम् | भानुभिः |
| चतुर्थी | भानवे | भानुभ्याम् | भानुभ्यः |
| पञ्चमी | भानोः | भानुभ्याम् | भानुभ्यः |
| षष्ठी | भानोः | भान्वोः | भानूनाम् |
| सप्तमी | भानौ | भान्वोः | भानुषु |
| सम्बोधन | हे भानो | हे भानू | हे भानवः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भानुः | भानु (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: भानु (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
भानुः ➤ प्रकाश, कान्ति चमक
संस्कृत: सूर्यः, किरणः · पर्याय: सूर, सूर्य, अर्यमन्, आदित्य, द्वादशात्मन्
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| भानु |
सूर्य के और नाम (१.३.३३) — हंस, सहस्रांशु, तपन, सविता, रवि, पद्माक्ष, तेजसांराशि, छायानाथ किरण के नाम (१.३.३७) — किरण, अस्र, मयूख, अंशु, गभस्ति, घृणि, रश्मि, कर |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.४ सेकण्ड