॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: याचना करना, मांगना, प्राप्त करना, प्राप्त न होना
संस्कृत: भिक्षायामलाभे लाभे च
अंग्रेज़ी: to ask,to beg, to request
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भिक्षते | भिक्षेते | भिक्षन्ते |
| मध्यम | भिक्षसे | भिक्षेथे | भिक्षध्वे |
| उत्तम | भिक्षे | भिक्षावहे | भिक्षामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): भिक्षते · लिट् (आत्मने.): बिभिक्षे · लुट् (आत्मने.): भिक्षिता · लृट् (आत्मने.): भिक्षिष्यते · लोट् (आत्मने.): भिक्षताम् · लङ् (आत्मने.): अभिक्षत · विधिलिङ् (आत्मने.): भिक्षेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): भिक्षिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अभिक्षिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अभिक्षिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भिक्षण · ण्वुल्: भिक्षकः · तृच्: भिक्षिता · ण्यत्: भिक्ष्यः · तव्य: भिक्षितव्यः · अनीयर्: भिक्षणीयः · क्त: भिक्षितः · क्तवतु: भिक्षितवान् · शानच्: भिक्षमाणः · क्त्वा: भिक्षित्वा · ल्यप्: प्रभिक्ष्य · तुमुन्: भिक्षितुम् · णमुल्: भिक्षम् · घञ्: भिक्षः · क्तिन्: भिष्टि · क्वसु: बिभिक्ष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भिक्षते | भिक्ष् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: भिक्षता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भिक्ष् + घञ् · तद्धित: भिक्ष + तल् (भाववाचक) | भिक्षता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: भिक्ष् + घञ् · तद्धित: भिक्ष + तल् (भाववाचक) |
भिक्षते ➤ याचना करना, मांगना, प्राप्त करना, प्राप्त न होना
संस्कृत: भिक्षायामलाभे लाभे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड