२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
भिक्ष् (भिक्षँ)
भ्वादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 01.0690
धात्वर्थ: भिक्षायामलाभे लाभे च — याचना करना, मांगना, प्राप्त करना, प्राप्त न होना (to ask,to beg, to request)
कर्तरि — आत्मनेपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्षते भिक्षेते भिक्षन्ते मध्यम भिक्षसे भिक्षेथे भिक्षध्वे उत्तम भिक्षे भिक्षावहे भिक्षामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्षताम् भिक्षेताम् भिक्षन्ताम् मध्यम भिक्षस्व भिक्षेथाम् भिक्षध्वम् उत्तम भिक्षै भिक्षावहै भिक्षामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अभिक्षत अभिक्षेताम् अभिक्षन्त मध्यम अभिक्षथाः अभिक्षेथाम् अभिक्षध्वम् उत्तम अभिक्षे अभिक्षावहि अभिक्षामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्षेत भिक्षेयाताम् भिक्षेरन् मध्यम भिक्षेथाः भिक्षेयाथाम् भिक्षेध्वम् उत्तम भिक्षेय भिक्षेवहि भिक्षेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्षिष्यते भिक्षिष्येते भिक्षिष्यन्ते मध्यम भिक्षिष्यसे भिक्षिष्येथे भिक्षिष्यध्वे उत्तम भिक्षिष्ये भिक्षिष्यावहे भिक्षिष्यामहे
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्षिता भिक्षितारौ भिक्षितारः मध्यम भिक्षितासे भिक्षितासाथे भिक्षिताध्वे उत्तम भिक्षिताहे भिक्षितास्वहे भिक्षितास्महे
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम बिभिक्षे बिभिक्षाते बिभिक्षिरे मध्यम बिभिक्षिषे बिभिक्षाथे बिभिक्षिध्वे उत्तम बिभिक्षे बिभिक्षिवहे बिभिक्षिमहे
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अभिक्षिष्ट अभिक्षिषाताम् अभिक्षिषत मध्यम अभिक्षिष्ठाः अभिक्षिषाथाम् अभिक्षिध्वम् उत्तम अभिक्षिषि अभिक्षिष्वहि अभिक्षिष्महि
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्षिषीष्ट भिक्षिषीयास्ताम् भिक्षिषीरन् मध्यम भिक्षिषीष्ठाः भिक्षिषीयास्थाम् भिक्षिषीध्वम् उत्तम भिक्षिषीय भिक्षिषीवहि भिक्षिषीमहि
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अभिक्षिष्यत अभिक्षिष्येताम् अभिक्षिष्यन्त मध्यम अभिक्षिष्यथाः अभिक्षिष्येथाम् अभिक्षिष्यध्वम् उत्तम अभिक्षिष्ये अभिक्षिष्यावहि अभिक्षिष्यामहि
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्ष्यते भिक्ष्येते भिक्ष्यन्ते मध्यम भिक्ष्यसे भिक्ष्येथे भिक्ष्यध्वे उत्तम भिक्ष्ये भिक्ष्यावहे भिक्ष्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्ष्यताम् भिक्ष्येताम् भिक्ष्यन्ताम् मध्यम भिक्ष्यस्व भिक्ष्येथाम् भिक्ष्यध्वम् उत्तम भिक्ष्यै भिक्ष्यावहै भिक्ष्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अभिक्ष्यत अभिक्ष्येताम् अभिक्ष्यन्त मध्यम अभिक्ष्यथाः अभिक्ष्येथाम् अभिक्ष्यध्वम् उत्तम अभिक्ष्ये अभिक्ष्यावहि अभिक्ष्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्ष्येत भिक्ष्येयाताम् भिक्ष्येरन् मध्यम भिक्ष्येथाः भिक्ष्येयाथाम् भिक्ष्येध्वम् उत्तम भिक्ष्येय भिक्ष्येवहि भिक्ष्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भिक्षिष्यते भिक्षिष्येते भिक्षिष्यन्ते मध्यम भिक्षिष्यसे भिक्षिष्येथे भिक्षिष्यध्वे उत्तम भिक्षिष्ये भिक्षिष्यावहे भिक्षिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त भिक्षण — — भिक्षणम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त भिक्षक भिक्षकः भिक्षिका भिक्षकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त भिक्षितृ भिक्षिता भिक्षित्री भिक्षितृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त भिक्ष्य भिक्ष्यः भिक्ष्या भिक्ष्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) भिक्षितव्य भिक्षितव्यः भिक्षितव्या भिक्षितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त भिक्षणीय भिक्षणीयः भिक्षणीया भिक्षणीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) भिक्षित भिक्षितः भिक्षिता भिक्षितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) भिक्षितवत् भिक्षितवान् भिक्षितवती भिक्षितवत् / भिक्षितवद्
शानच् वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद) भिक्षमाण भिक्षमाणः भिक्षमाणा भिक्षमाणम्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) भिक्षित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रभिक्ष्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) भिक्षितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय भिक्षम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त भिक्ष भिक्षः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त भिष्टि — भिष्टिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त बिभिक्ष्वस् बिभिक्ष्वान् बिभिक्षुषी बिभिक्ष्वत् / बिभिक्ष्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।