🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:27:09 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

भिनत्ति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

भिनत्ति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

भिनत्ति

अर्थ: चीरना, तोडना

संस्कृत: विदारणे

अंग्रेज़ी: to cut, to break, to divide

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. भिद् धातु (रुधादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — भिद् (रुधादिगण) · अर्थ: चीरना, तोडना (विदारणे)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमभिनत्तिभिन्तः / भिन्त्तःभिन्दन्ति
मध्यमभिनत्सिभिन्त्थः / भिन्थःभिन्त्थ / भिन्थ
उत्तमभिनद्मिभिन्द्वःभिन्द्मः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: भिनत्ति · लट् (आत्मने.): भिन्ते · लिट्: बिभेद · लिट् (आत्मने.): बिभिदे · लुट्: भेत्ता · लुट् (आत्मने.): भेत्ता · लृट्: भेत्स्यति · लृट् (आत्मने.): भेत्स्यते · लोट्: भिनत्तु · लोट् (आत्मने.): भिन्ताम् · लङ्: अभिनत् · लङ् (आत्मने.): अभिन्त · विधिलिङ्: भिन्द्यात् · विधिलिङ् (आत्मने.): भिन्दीत · आशीर्लिङ्: भिद्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): भित्सीष्ट · लुङ्: अभिदत् · लुङ् (आत्मने.): अभित्त · लृङ्: अभेत्स्यत् · लृङ् (आत्मने.): अभेत्स्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भेदन · ण्वुल्: भेदकः · तृच्: भेत्ता · ण्यत्: भेद्यः · तव्य: भेत्तव्यः · अनीयर्: भेदनीयः · क्त: भिन्नः · क्तवतु: भिन्नवान् · शतृ: भिन्दन् · स्य-शतृ: भेत्स्यन् · शानच्: भिन्दानः · क्त्वा: भित्त्वा · ल्यप्: प्रभिद्य · तुमुन्: भेत्तुम् · णमुल्: भेदम् · घञ्: भेदः · क्तिन्: भित्ति · क्वसु: बिभिद्वान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
भिनत्तिभिद् धातु (रुधादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

भिनत्ति ➤ चीरना, तोडना
संस्कृत: विदारणे

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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