॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: वक्र होना, टेढ़ा होना
संस्कृत: कौटिल्ये
अंग्रेज़ी: to bend,to curve,to be crooked
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भुजति | भुजतः | भुजन्ति |
| मध्यम | भुजसि | भुजथः | भुजथ |
| उत्तम | भुजामि | भुजावः | भुजामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: भुजति · लिट्: बुभोज · लुट्: भोक्ता · लृट्: भोक्ष्यति · लोट्: भुजतात् · लङ्: अभुजत् · विधिलिङ्: भुजेत् · आशीर्लिङ्: भुज्यात् · लुङ्: अभौक्षीत् · लृङ्: अभोक्ष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: भोजन · ण्वुल्: भोजकः · तृच्: भोक्ता · ण्यत्: भोज्यः · तव्य: भोक्तव्यः · अनीयर्: भोजनीयः · क्त: भुग्नः · क्तवतु: भुग्नवान् · शतृ: भुजन् · स्य-शतृ: भोक्ष्यन् · क्त्वा: भुक्त्वा · ल्यप्: प्रभुज्य · तुमुन्: भोक्तुम् · णमुल्: भोजम् · घञ्: भोगः · क्तिन्: भुक्ति · क्वसु: बुभुज्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भुजति | भुज् धातु (तुदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: भुजता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: भुज + तल् (भाववाचक) | भुजत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भुज् + शतृ |
भुजति ➤ वक्र होना, टेढ़ा होना
संस्कृत: कौटिल्ये
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड