॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: ऋषि, महात्मा, सन्त, भक्त, संन्यासी
संस्कृत: बुद्धः, मौनव्रतिः · पर्याय: सर्वज्ञ, सुगत, बुद्ध, धर्मराज, तथागत
व्युत्पत्ति: मन् + इन्, उच्चै मनुते जानाति यः (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मुनिः | मुनी | मुनयः |
| द्वितीया | मुनिम् | मुनी | मुनीन् |
| तृतीया | मुनिना | मुनिभ्याम् | मुनिभिः |
| चतुर्थी | मुनये | मुनिभ्याम् | मुनिभ्यः |
| पञ्चमी | मुनेः | मुनिभ्याम् | मुनिभ्यः |
| षष्ठी | मुनेः | मुन्योः | मुनीनाम् |
| सप्तमी | मुनौ | मुन्योः | मुनिषु |
| सम्बोधन | हे मुने | हे मुनी | हे मुनयः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मुनिः | मुनि (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
मुनिः ➤ ऋषि, महात्मा, सन्त, भक्त, संन्यासी
संस्कृत: बुद्धः, मौनव्रतिः · पर्याय: सर्वज्ञ, सुगत, बुद्ध, धर्मराज, तथागत
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| मुनि |
बुद्ध के और नाम (१.१.१४) — षडभिज्ञ, दशबल, अद्वयवादी, विनायक, मुनीन्द्र, श्रीघन, शास्ता मौनव्रती (२.७.४६) — वाचंयम |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड