🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 05:27:13 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

मुनिः

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

मुनिः

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

मुनिः

अर्थ: ऋषि, महात्मा, सन्त, भक्त, संन्यासी

संस्कृत: बुद्धः, मौनव्रतिः · पर्याय: सर्वज्ञ, सुगत, बुद्ध, धर्मराज, तथागत

व्युत्पत्ति: मन् + इन्, उच्चै मनुते जानाति यः (कृदन्त)

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. मुनि (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन

📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका

शब्दरूप — मुनि (पुंलिङ्ग)

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमामुनिःमुनीमुनयः
द्वितीयामुनिम्मुनीमुनीन्
तृतीयामुनिनामुनिभ्याम्मुनिभिः
चतुर्थीमुनयेमुनिभ्याम्मुनिभ्यः
पञ्चमीमुनेःमुनिभ्याम्मुनिभ्यः
षष्ठीमुनेःमुन्योःमुनीनाम्
सप्तमीमुनौमुन्योःमुनिषु
सम्बोधनहे मुनेहे मुनीहे मुनयः

रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
मुनिःमुनि (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

मुनिः ➤ ऋषि, महात्मा, सन्त, भक्त, संन्यासी
संस्कृत: बुद्धः, मौनव्रतिः · पर्याय: सर्वज्ञ, सुगत, बुद्ध, धर्मराज, तथागत

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

शब्दअमरकोश — विषय, पर्याय
मुनि
बुद्ध के और नाम (१.१.१४) — षडभिज्ञ, दशबल, अद्वयवादी, विनायक, मुनीन्द्र, श्रीघन, शास्ता

ⓘ विषय पर क्लिक करें — अमरकोश का वह मूल श्लोक अन्वय, अनुवाद व भावार्थ सहित खुलेगा; शब्द पर क्लिक करें — शब्द-रूपावली।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

  • मुनिः: मन् + इन्, उच्चै मनुते जानाति यः (कोश-व्युत्पत्ति)

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
💬 ज्योतिषीय प्रश्न पूछें