॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: सहन करना, क्षमा करना
संस्कृत: तितिक्षायाम्
अंग्रेज़ी: to tolerate,to bear,to endure,to suffer,to forgive
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | मृष्यति | मृष्यतः | मृष्यन्ति |
| मध्यम | मृष्यसि | मृष्यथः | मृष्यथ |
| उत्तम | मृष्यामि | मृष्यावः | मृष्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: मृष्यति · लट् (आत्मने.): मृष्यते · लिट्: ममर्ष · लिट् (आत्मने.): ममृषे · लुट्: मर्षिता · लुट् (आत्मने.): मर्षिता · लृट्: मर्षिष्यति · लृट् (आत्मने.): मर्षिष्यते · लोट्: मृष्यतात् · लोट् (आत्मने.): मृष्यताम् · लङ्: अमृष्यत् · लङ् (आत्मने.): अमृष्यत · विधिलिङ्: मृष्येत् · विधिलिङ् (आत्मने.): मृष्येत · आशीर्लिङ्: मृष्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): मर्षिषीष्ट · लुङ्: अमर्षीत् · लुङ् (आत्मने.): अमर्षिष्ट · लृङ्: अमर्षिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अमर्षिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: मर्षण · ण्वुल्: मर्षकः · तृच्: मर्षिता · तव्य: मर्षितव्यः · अनीयर्: मर्षणीयः · क्त: मर्षितः · क्तवतु: मर्षितवान् · शतृ: मृष्यन् · स्य-शतृ: मर्षिष्यन् · शानच्: मृष्यमाणः · क्त्वा: मृषित्वा · ल्यप्: प्रमृष्य · तुमुन्: मर्षितुम् · णमुल्: मर्षम् · घञ्: मर्षः · क्तिन्: मृष्टि · क्वसु: ममृष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मृष्यति | मृष् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: मृष्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मृष् + शतृ | मृष्यता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मृष् + क्यप् · तद्धित: मृष्य + तल् (भाववाचक) |
मृष्यति ➤ सहन करना, क्षमा करना
संस्कृत: तितिक्षायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड