॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: यज्ञ करना, हवन करना, देवपूजा करना,संगति करना, देना
संस्कृत: देवपूजासङ्गतिकरणदानेषु
अंग्रेज़ी: to sacrifice, to offer to a deity, to worship, to get associated with, to give
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | यजति | यजतः | यजन्ति |
| मध्यम | यजसि | यजथः | यजथ |
| उत्तम | यजामि | यजावः | यजामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: यजति · लट् (आत्मने.): यजते · लिट्: इयाज · लिट् (आत्मने.): ईजे · लुट्: यष्टा · लुट् (आत्मने.): यष्टा · लृट्: यक्ष्यति · लृट् (आत्मने.): यक्ष्यते · लोट्: यजतात् · लोट् (आत्मने.): यजताम् · लङ्: अयजत् · लङ् (आत्मने.): अयजत · विधिलिङ्: यजेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): यजेत · आशीर्लिङ्: इज्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): यक्षीष्ट · लुङ्: अयाक्षीत् · लुङ् (आत्मने.): अयष्ट · लृङ्: अयक्ष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अयक्ष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: यजन · ण्वुल्: याजकः · तृच्: यष्टा · ण्यत्: याज्यः · तव्य: यष्टव्यः · अनीयर्: यजनीयः · क्त: इष्टः · क्तवतु: इष्टवान् · शतृ: यजन् · स्य-शतृ: यक्ष्यन् · शानच्: यजमानः · क्त्वा: इष्ट्वा · ल्यप्: प्रेज्य · तुमुन्: यष्टुम् · णमुल्: याजम् · घञ्: यागः · क्तिन्: इष्टि · क्वसु: ईजिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| यजति | यज् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: यजत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: यज् + शतृ | यजत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: यज् + शतृ |
यजति ➤ यज्ञ करना, हवन करना, देवपूजा करना,संगति करना, देना
संस्कृत: देवपूजासङ्गतिकरणदानेषु
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड