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🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

यजति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

यजति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

यजति

अर्थ: यज्ञ करना, हवन करना, देवपूजा करना,संगति करना, देना

संस्कृत: देवपूजासङ्गतिकरणदानेषु

अंग्रेज़ी: to sacrifice, to offer to a deity, to worship, to get associated with, to give

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. यज् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. यजत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: यज् + शतृ
  3. यजत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: यज् + शतृ

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — यज् (भ्वादिगण) · अर्थ: यज्ञ करना, हवन करना, देवपूजा करना,संगति करना, देना (देवपूजासङ्गतिकरणदानेषु)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमयजतियजतःयजन्ति
मध्यमयजसियजथःयजथ
उत्तमयजामियजावःयजामः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: यजति · लट् (आत्मने.): यजते · लिट्: इयाज · लिट् (आत्मने.): ईजे · लुट्: यष्टा · लुट् (आत्मने.): यष्टा · लृट्: यक्ष्यति · लृट् (आत्मने.): यक्ष्यते · लोट्: यजतात् · लोट् (आत्मने.): यजताम् · लङ्: अयजत् · लङ् (आत्मने.): अयजत · विधिलिङ्: यजेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): यजेत · आशीर्लिङ्: इज्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): यक्षीष्ट · लुङ्: अयाक्षीत् · लुङ् (आत्मने.): अयष्ट · लृङ्: अयक्ष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अयक्ष्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: यजन · ण्वुल्: याजकः · तृच्: यष्टा · ण्यत्: याज्यः · तव्य: यष्टव्यः · अनीयर्: यजनीयः · क्त: इष्टः · क्तवतु: इष्टवान् · शतृ: यजन् · स्य-शतृ: यक्ष्यन् · शानच्: यजमानः · क्त्वा: इष्ट्वा · ल्यप्: प्रेज्य · तुमुन्: यष्टुम् · णमुल्: याजम् · घञ्: यागः · क्तिन्: इष्टि · क्वसु: ईजिवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
यजतियज् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: यजत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: यज् + शतृ | यजत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: यज् + शतृ

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

यजति ➤ यज्ञ करना, हवन करना, देवपूजा करना,संगति करना, देना
संस्कृत: देवपूजासङ्गतिकरणदानेषु

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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