॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: स्वाधीन रखना, काबू में रखना, पोषण करना, खाने को देना
संस्कृत: परिवेषणे
अंग्रेज़ी: to keep under control, to nourish, to nurture, to serve food
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | यमयति | यमयतः | यमयन्ति |
| मध्यम | यमयसि | यमयथः | यमयथ |
| उत्तम | यमयामि | यमयावः | यमयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: यमयति · लट् (आत्मने.): यमयते · लिट्: यमयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): यमयाञ्चक्रे · लुट्: यमयिता · लुट् (आत्मने.): यमयिता · लृट्: यमयिष्यति · लृट् (आत्मने.): यमयिष्यते · लोट्: यमयतात् · लोट् (आत्मने.): यमयताम् · लङ्: अयमयत् · लङ् (आत्मने.): अयमयत · विधिलिङ्: यमयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): यमयेत · आशीर्लिङ्: यम्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): यमयिषीष्ट · लुङ्: अयीयमत् · लुङ् (आत्मने.): अयीयमत · लृङ्: अयमयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अयमयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: यमन · ण्वुल्: यमकः · तृच्: यमयिता · यत्: यम्यः · तव्य: यमयितव्यः · अनीयर्: यमनीयः · क्त: यमितः · क्तवतु: यमितवान् · शतृ: यमयन् · स्य-शतृ: यमयिष्यन् · शानच्: यमयमानः · क्त्वा: यमयित्वा · ल्यप्: प्रयमय्य · तुमुन्: यमयितुम् · णमुल्: यामम् · क्तिन्: यन्ति · क्वसु: यमयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| यमयति | यम् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: यम् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | यम् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) |
यमयति ➤ स्वाधीन रखना, काबू में रखना, पोषण करना, खाने को देना
संस्कृत: परिवेषणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड