॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बीज बोना, बोना, अन्नादि काटना, केश काटना
संस्कृत: बीजसन्ताने गर्भाधाने छेदने बीजतन्तुसन्ताने मुण्डबीजोप्त्योः वपने घर्षणे तन्तुनिर्माणे च
अंग्रेज़ी: to sow,to plant,to chop
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | वपति | वपतः | वपन्ति |
| मध्यम | वपसि | वपथः | वपथ |
| उत्तम | वपामि | वपावः | वपामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: वपति · लट् (आत्मने.): वपते · लिट्: उवाप · लिट् (आत्मने.): ऊपे · लुट्: वप्ता · लुट् (आत्मने.): वप्ता · लृट्: वप्स्यति · लृट् (आत्मने.): वप्स्यते · लोट्: वपतात् · लोट् (आत्मने.): वपताम् · लङ्: अवपत् · लङ् (आत्मने.): अवपत · विधिलिङ्: वपेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): वपेत · आशीर्लिङ्: उप्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): वप्सीष्ट · लुङ्: अवाप्सीत् · लुङ् (आत्मने.): अवप्त · लृङ्: अवप्स्यत् · लृङ् (आत्मने.): अवप्स्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: वपन · ण्वुल्: वापकः · तृच्: वप्ता · ण्यत्: वाप्यः · तव्य: वप्तव्यः · अनीयर्: वपनीयः · क्त: उप्तः · क्तवतु: उप्तवान् · शतृ: वपन् · स्य-शतृ: वप्स्यन् · शानच्: वपमानः · क्त्वा: उप्त्वा · ल्यप्: प्रोप्य · तुमुन्: वप्तुम् · णमुल्: वापम् · घञ्: वापः · क्तिन्: उप्ति · क्वसु: ऊपिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| वपति | वप् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: वपता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: वप + तल् (भाववाचक) | वपत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: वप् + शतृ |
वपति ➤ बीज बोना, बोना, अन्नादि काटना, केश काटना
संस्कृत: बीजसन्ताने गर्भाधाने छेदने बीजतन्तुसन्ताने मुण्डबीजोप्त्योः वपने घर्षणे तन्तुनिर्माणे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड