॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: आज्ञा करना, कहना, बोध करना, अधिकार करना, शासन करना, शासक होना
संस्कृत: अनुशिष्टौ
अंग्रेज़ी: to order, to tell, to explain, to educate, to inform, to rule, to command to punish
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शास्ति | शिष्टः | शासति |
| मध्यम | शास्सि | शिष्ठः | शिष्ठ |
| उत्तम | शास्मि | शिष्वः | शिष्मः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: शास्ति · लिट्: शशास · लुट्: शासिता · लृट्: शासिष्यति · लोट्: शास्तु · लङ्: अशात् · विधिलिङ्: शिष्यात् · आशीर्लिङ्: शिष्यात् · लुङ्: अशिषत् · लृङ्: अशासिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: शासन · ण्वुल्: शासकः · तृच्: शासिता · तव्य: शासितव्यः · अनीयर्: शासनीयः · क्त: शिष्टः · क्तवतु: शिष्टवान् · शतृ: शासत्/शासद् · स्य-शतृ: शासिष्यन् · क्त्वा: शिष्ट्वा · ल्यप्: प्रशिष्य · तुमुन्: शासितुम् · णमुल्: शासम् · घञ्: शासः · क्तिन्: शिष्टि · क्वसु: शिशिष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| शास्ति | शास् धातु (अदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन |
शास्ति ➤ आज्ञा करना, कहना, बोध करना, अधिकार करना, शासन करना, शासक होना
संस्कृत: अनुशिष्टौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड