॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: पेट दुखना, पीड़ा होना, आंव पड़ना, बीमार होना, शूल पर चढ़ना
संस्कृत: रुजायां सङ्घाते सङ्कोषे च
अंग्रेज़ी: to be ill,to have stomach ache, to have pain
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शूलति | शूलतः | शूलन्ति |
| मध्यम | शूलसि | शूलथः | शूलथ |
| उत्तम | शूलामि | शूलावः | शूलामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: शूलति · लिट्: शुशूल · लुट्: शूलिता · लृट्: शूलिष्यति · लोट्: शूलतात् · लङ्: अशूलत् · विधिलिङ्: शूलेत् · आशीर्लिङ्: शूल्यात् · लुङ्: अशूलीत् · लृङ्: अशूलिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: शूलन · ण्वुल्: शूलकः · तृच्: शूलिता · ण्यत्: शूल्यः · तव्य: शूलितव्यः · अनीयर्: शूलनीयः · क्त: शूलितः · क्तवतु: शूलितवान् · शतृ: शूलन् · स्य-शतृ: शूलिष्यन् · क्त्वा: शूलित्वा · ल्यप्: प्रशूल्य · तुमुन्: शूलितुम् · णमुल्: शूलम् · घञ्: शूलः · क्तिन्: शूल्ति · क्वसु: शुशूल्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| शूलति | शूल् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: शूलता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: शूल + तल् (भाववाचक) | शूलत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: शूल् + शतृ |
शूलति ➤ पेट दुखना, पीड़ा होना, आंव पड़ना, बीमार होना, शूल पर चढ़ना
संस्कृत: रुजायां सङ्घाते सङ्कोषे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड