॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: शेष रखना, बचा रखना, पूरा खर्च न करना
संस्कृत: असर्वोपयोगे
अंग्रेज़ी: to retain, to save
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शेषति / शेषयति | शेषतः / शेषयतः | शेषन्ति / शेषयन्ति |
| मध्यम | शेषयसि / शेषसि | शेषथः / शेषयथः | शेषथ / शेषयथ |
| उत्तम | शेषयामि / शेषामि | शेषयावः / शेषावः | शेषयामः / शेषामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: शेषति · लट् (आत्मने.): शेषयते · लिट्: शिशेष · लिट् (आत्मने.): शेषयाञ्चक्रे · लुट्: शेषयिता · लुट् (आत्मने.): शेषयिता · लृट्: शेक्ष्यति · लृट् (आत्मने.): शेषयिष्यते · लोट्: शेषतात् · लोट् (आत्मने.): शेषयताम् · लङ्: अशेषत् · लङ् (आत्मने.): अशेषयत · विधिलिङ्: शेषयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): शेषयेत · आशीर्लिङ्: शिष्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): शेषयिषीष्ट · लुङ्: अशिक्षत् · लुङ् (आत्मने.): अशीशिषत · लृङ्: अशेक्ष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अशेषयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: शेषण · ण्वुल्: शेषकः · तृच्: शेष्टा · यत्: शेष्यः · ण्यत्: शेष्यः · तव्य: शेष्टव्यः · अनीयर्: शेषणीयः · क्त: शिष्टः · क्तवतु: शिष्टवान् · शतृ: शेषन् · स्य-शतृ: शेक्ष्यन् · शानच्: शेषयमाणः · क्त्वा: शिष्ट्वा · ल्यप्: प्रशिष्य · तुमुन्: शेष्टुम् · णमुल्: शेषम् · घञ्: शेषः · क्तिन्: शिष्टि · क्वसु: शिशिष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| शेषति | शिष् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: शिष् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | शेषता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: शेष + तल् (भाववाचक) |
शेषति ➤ शेष रखना, बचा रखना, पूरा खर्च न करना
संस्कृत: असर्वोपयोगे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड