॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: अवरोध करना, रोकना, एकत्र करना, स्पर्श करना, छूना
संस्कृत: बाधनस्पर्शनयोः
अंग्रेज़ी: to obstruct,to stop, to hinder, to touch, to collect
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | स्पशति | स्पशतः | स्पशन्ति |
| मध्यम | स्पशसि | स्पशथः | स्पशथ |
| उत्तम | स्पशामि | स्पशावः | स्पशामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: स्पशति · लट् (आत्मने.): स्पशते · लिट्: पस्पाश · लिट् (आत्मने.): पस्पशे · लुट्: स्पशिता · लुट् (आत्मने.): स्पशिता · लृट्: स्पशिष्यति · लृट् (आत्मने.): स्पशिष्यते · लोट्: स्पशतात् · लोट् (आत्मने.): स्पशताम् · लङ्: अस्पशत् · लङ् (आत्मने.): अस्पशत · विधिलिङ्: स्पशेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): स्पशेत · आशीर्लिङ्: स्पश्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): स्पशिषीष्ट · लुङ्: अस्पशीत् · लुङ् (आत्मने.): अस्पशिष्ट · लृङ्: अस्पशिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अस्पशिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: स्पशन · ण्वुल्: स्पाशकः · तृच्: स्पशिता · ण्यत्: स्पाश्यः · तव्य: स्पशितव्यः · अनीयर्: स्पशनीयः · क्त: स्पशितः · क्तवतु: स्पशितवान् · शतृ: स्पशन् · स्य-शतृ: स्पशिष्यन् · शानच्: स्पशमानः · क्त्वा: स्पशित्वा · ल्यप्: प्रस्पश्य · तुमुन्: स्पशितुम् · णमुल्: स्पाशम् · घञ्: स्पाशः · क्तिन्: स्पष्टि · क्वसु: पस्पश्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| स्पशति | स्पश् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: स्पशता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: स्पश + तल् (भाववाचक) | स्पशत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: स्पश् + शतृ |
स्पशति ➤ अवरोध करना, रोकना, एकत्र करना, स्पर्श करना, छूना
संस्कृत: बाधनस्पर्शनयोः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड