🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 07:40:32 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

स्पाशयते

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

स्पाशयते

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

स्पाशयते

अर्थ: लेना, संयोग करना, जोड़ना

संस्कृत: ग्रहणसंश्लेषणयोः

अंग्रेज़ी: to take, to join, to unite

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. स्पश् धातु (चुरादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. स्पश् धातु (चुरादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक)
  3. स्पश् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक)
  4. स्पाशयत् (नपुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: स्पश् + णिच्+शतृ
  5. स्पाशयत् (पुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: स्पश् + णिच्+शतृ

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — स्पश् (चुरादिगण) · अर्थ: लेना, संयोग करना, जोड़ना (ग्रहणसंश्लेषणयोः)

लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमस्पाशयतेस्पाशयेतेस्पाशयन्ते
मध्यमस्पाशयसेस्पाशयेथेस्पाशयध्वे
उत्तमस्पाशयेस्पाशयावहेस्पाशयामहे

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): स्पाशयते · लिट् (आत्मने.): स्पाशयाञ्चक्रे · लुट् (आत्मने.): स्पाशयिता · लृट् (आत्मने.): स्पाशयिष्यते · लोट् (आत्मने.): स्पाशयताम् · लङ् (आत्मने.): अस्पाशयत · विधिलिङ् (आत्मने.): स्पाशयेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): स्पाशयिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अपस्पशत · लृङ् (आत्मने.): अस्पाशयिष्यत

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: स्पाशन · ण्वुल्: स्पाशकः · तृच्: स्पाशयिता · यत्: स्पाश्यः · तव्य: स्पाशयितव्यः · अनीयर्: स्पाशनीयः · क्त: स्पाशितः · क्तवतु: स्पाशितवान् · शानच्: स्पाशयमानः · क्त्वा: स्पाशयित्वा · ल्यप्: प्रस्पाश्य · तुमुन्: स्पाशयितुम् · णमुल्: स्पाशम् · क्तिन्: स्पाष्टि · क्वसु: स्पाशयाम्बभूवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
स्पाशयतेस्पश् धातु (चुरादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: स्पश् धातु (चुरादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | स्पश् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक)

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

स्पाशयते ➤ लेना, संयोग करना, जोड़ना
संस्कृत: ग्रहणसंश्लेषणयोः

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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