॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: सन्तुष्ट करना, प्रसन्न करना, पालन करना, जाना
संस्कृत: प्रीतिपालनयोः प्रीतिचलनयोश्च
अंग्रेज़ी: to satisfy, to please, to nurture, to nourish, to go
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | स्पृणोति | स्पृणुतः | स्पृण्वन्ति |
| मध्यम | स्पृणोषि | स्पृणुथः | स्पृणुथ |
| उत्तम | स्पृणोमि | स्पृणुवः / स्पृण्वः | स्पृणुमः / स्पृण्मः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: स्पृणोति · लिट्: पस्पार · लुट्: स्पर्ता · लृट्: स्परिष्यति · लोट्: स्पृणुतात् · लङ्: अस्पृणोत् · विधिलिङ्: स्पृणुयात् · आशीर्लिङ्: स्पर्यात् · लुङ्: अस्पार्षीत् · लृङ्: अस्परिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: स्परण · ण्वुल्: स्पारकः · तृच्: स्पर्ता · ण्यत्: स्पार्यः · तव्य: स्पर्तव्यः · अनीयर्: स्परणीयः · क्त: स्पृतः · क्तवतु: स्पृतवान् · शतृ: स्पृण्वन् · स्य-शतृ: स्परिष्यन् · क्त्वा: स्पृत्वा · ल्यप्: प्रस्पृत्य · तुमुन्: स्पर्तुम् · णमुल्: स्पारम् · घञ्: स्पारः · क्तिन्: स्पृति · क्वसु: पस्पृवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| स्पृणोति | स्पृ धातु (स्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन |
स्पृणोति ➤ सन्तुष्ट करना, प्रसन्न करना, पालन करना, जाना
संस्कृत: प्रीतिपालनयोः प्रीतिचलनयोश्च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड