॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: हिन्दी अर्थ उपलब्ध नहीं
संस्कृत: परिहासे
अंग्रेज़ी: to make fun of, to laugh at, to joke
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | स्फुण्टति / स्फुण्टयति | स्फुण्टतः / स्फुण्टयतः | स्फुण्टन्ति / स्फुण्टयन्ति |
| मध्यम | स्फुण्टयसि / स्फुण्टसि | स्फुण्टथः / स्फुण्टयथः | स्फुण्टथ / स्फुण्टयथ |
| उत्तम | स्फुण्टयामि / स्फुण्टामि | स्फुण्टयावः / स्फुण्टावः | स्फुण्टयामः / स्फुण्टामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: स्फुण्टति · लट् (आत्मने.): स्फुण्टयते · लिट्: पुस्फुण्ट · लिट् (आत्मने.): स्फुण्टयाञ्चक्रे · लुट्: स्फुण्टयिता · लुट् (आत्मने.): स्फुण्टयिता · लृट्: स्फुण्टयिष्यति · लृट् (आत्मने.): स्फुण्टयिष्यते · लोट्: स्फुण्टतात् · लोट् (आत्मने.): स्फुण्टयताम् · लङ्: अस्फुण्टत् · लङ् (आत्मने.): अस्फुण्टयत · विधिलिङ्: स्फुण्टयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): स्फुण्टयेत · आशीर्लिङ्: स्फुण्ट्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): स्फुण्टयिषीष्ट · लुङ्: अपुस्फुण्टत् · लुङ् (आत्मने.): अपुस्फुण्टत · लृङ्: अस्फुण्टयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अस्फुण्टयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: स्फुण्टन · ण्वुल्: स्फुण्टकः · तृच्: स्फुण्टिता · यत्: स्फुण्ट्यः · ण्यत्: स्फुण्ट्यः · तव्य: स्फुण्टितव्यः · अनीयर्: स्फुण्टनीयः · क्त: स्फुण्टितः · क्तवतु: स्फुण्टितवान् · शतृ: स्फुण्टन् · स्य-शतृ: स्फुण्टिष्यन् · शानच्: स्फुण्टयमानः · क्त्वा: स्फुण्टित्वा · ल्यप्: प्रस्फुण्ट्य · तुमुन्: स्फुण्टितुम् · णमुल्: स्फुण्टम् · घञ्: स्फुण्टः · क्तिन्: स्फुण्टि · क्वसु: पुस्फुण्ट्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| स्फुण्टति | स्फुण्ट् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: स्फुण्ट् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | स्फुण्टत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: स्फुण्ट् + शतृ |
स्फुण्टति ➤ to make fun of, to laugh at, to joke (अंग्रेज़ी कोश)
संस्कृत: परिहासे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड