॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: ले जाना, हरण करना, चोरी करना
संस्कृत: हरणे
अंग्रेज़ी: to take way, to carry, to steal, to acquire
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | हरति | हरतः | हरन्ति |
| मध्यम | हरसि | हरथः | हरथ |
| उत्तम | हरामि | हरावः | हरामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: हरति · लट् (आत्मने.): हरते · लिट्: जहार · लिट् (आत्मने.): जह्रे · लुट्: हर्ता · लुट् (आत्मने.): हर्ता · लृट्: हरिष्यति · लृट् (आत्मने.): हरिष्यते · लोट्: हरतात् · लोट् (आत्मने.): हरताम् · लङ्: अहरत् · लङ् (आत्मने.): अहरत · विधिलिङ्: हरेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): हरेत · आशीर्लिङ्: ह्रियात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): हृषीष्ट · लुङ्: अहार्षीत् · लुङ् (आत्मने.): अहृत · लृङ्: अहरिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अहरिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: हरण · ण्वुल्: हारकः · तृच्: हर्ता · ण्यत्: हार्यः · तव्य: हर्तव्यः · अनीयर्: हरणीयः · क्त: हृतः · क्तवतु: हृतवान् · शतृ: हरन् · स्य-शतृ: हरिष्यन् · शानच्: हरमाणः · क्त्वा: हृत्वा · ल्यप्: प्रहृत्य · तुमुन्: हर्तुम् · णमुल्: हारम् · घञ्: हारः · क्तिन्: हृति · क्वसु: जहृवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| हरति | हृ धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: हरता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: हर + तल् (भाववाचक) | हरत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: हृ + शतृ |
हरति ➤ ले जाना, हरण करना, चोरी करना
संस्कृत: हरणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड