॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: संतुष्ट होना, प्रसन्न होना
संस्कृत: तुष्टौ
अंग्रेज़ी: to be delighted , to rejoice , to be happy, to fill with pleasure
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | हृष्यति | हृष्यतः | हृष्यन्ति |
| मध्यम | हृष्यसि | हृष्यथः | हृष्यथ |
| उत्तम | हृष्यामि | हृष्यावः | हृष्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: हृष्यति · लिट्: जहर्ष · लुट्: हर्षिता · लृट्: हर्षिष्यति · लोट्: हृष्यतात् · लङ्: अहृष्यत् · विधिलिङ्: हृष्येत् · आशीर्लिङ्: हृष्यात् · लुङ्: अहृषत् · लृङ्: अहर्षिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: हर्षण · ण्वुल्: हर्षकः · तृच्: हर्षिता · तव्य: हर्षितव्यः · अनीयर्: हर्षणीयः · क्त: हृषितः · क्तवतु: हृषितवान् · शतृ: हृष्यन् · स्य-शतृ: हर्षिष्यन् · क्त्वा: हर्षित्वा · ल्यप्: प्रहृष्य · तुमुन्: हर्षितुम् · णमुल्: हर्षम् · घञ्: हर्षः · क्तिन्: हृष्टि · क्वसु: जहृष्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| हृष्यति | हृष् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: हृष्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: हृष् + शतृ | हृष्यता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: हृष् + क्यप् · तद्धित: हृष्य + तल् (भाववाचक) |
हृष्यति ➤ संतुष्ट होना, प्रसन्न होना
संस्कृत: तुष्टौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड