🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:24:23 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: श्लोक / पद्य · रोमन लिपि (IAST) से देवनागरी में बदला गया: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन (बदलाव जाँच लें; सरल अंग्रेज़ी-टाइपिंग में दीर्घ स्वर/ष-श का भेद स्पष्ट नहीं होता)

🔔 मूलश्लोकः

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

कर्मणि+एव+अधिकारः+ते।मा।फलेषु।कदाचन

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
कर्मणिकर्मन् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन
एवअव्ययम्
अधिकारःअधिकार (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन
तेयुष्मद् (त्रि.) — षष्ठी विभक्ति, एकवचन
अन्य सम्भावना: युष्मद् (त्रि.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन | तद् (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, बहुवचन
माअव्ययम्
फलेषुफल (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, बहुवचन
कदाचनअव्ययम्

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

कर्मणि ➤ कृत्य, कार्य, कर्म
संस्कृत: क्रिया · पर्याय: क्रिया, कृत्या, लीला

एव ➤ ठीक, बिल्कुल, सही तौर पर

अधिकारः ➤ अधीक्षण, देखभाल करना
संस्कृत: राज्ञां छत्रचामरादिव्यापारः · पर्याय: प्रक्रिया

ते ➤ तुम
संस्कृत: त्वम्

मा ➤ प्रतिषेधबोधक अव्यय, (नकारात्मक विरलतः) प्रायः लोट् लकार की क्रिया के साथ जुड़ा हुआ

फलेषु ➤ फल जैसे वृक्ष का
संस्कृत: वृक्षफलम्, वस्त्रयोनिः, फलकः, लाङ्गलस्याधस्थलोहकाष्ठम्, अधिकफलम्, सस्यहेतुकृतम् · पर्याय: सस्य

कदाचन ➤ किसी समय, एकदिन, एकबार, एकदफ़ा

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

शब्दअमरकोश — विषय, पर्याय
कर्मन्
क्रिया (३.२.१) — क्रिया
क्रिया के नौ अर्थ (३.३.१६५) — आरम्भ, प्रायश्चित्त, शिक्षा, पूजा, विचार, उपाय, चेष्टा, चिकित्सा
अधिकार
फल
हल का (लोहे का) फाल (२.९.१४) — निरीश, कुटक, फाल, कृषक

ⓘ विषय पर क्लिक करें — अमरकोश का वह मूल श्लोक अन्वय, अनुवाद व भावार्थ सहित खुलेगा; शब्द पर क्लिक करें — शब्द-रूपावली।

🌻 अन्वयः स्वचालित — अनुमानित

ते अधिकारः कर्मणि एव फलेषु कदाचन मा।

ⓘ यह अन्वय विभक्ति, पुरुष-वचन व वाक्य-क्रम के नियमों से स्वतः बना है — काव्यार्थ के लिए गुरु/टीका से अवश्य मिलाएँ।

📢 भावार्थः

शब्दशः अर्थ (पद-क्रम में, स्वचालित)

कर्मणि = कृत्य · एव = ठीक · अधिकारः = अधीक्षण · ते = तुम · मा = प्रतिषेधबोधक अव्यय · फलेषु = फल जैसे वृक्ष का · कदाचन = किसी समय

ⓘ धाराप्रवाह भावार्थ (संस्कृत/हिन्दी/अंग्रेज़ी) लिखना केवल AI या विद्वान ही कर सकते हैं; यह साधन किसी बाहरी AI का प्रयोग नहीं करता। साइट के श्रीमद्भागवत के सभी १४,०९९ श्लोकों का पूर्ण भावार्थ उपलब्ध है — उनमें से कोई श्लोक लिखें तो भावार्थ स्वतः दिखेगा।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

पदम्विच्छेदःसन्धिसूत्रम्
कर्मण्येवाधिकारस्तेकर्मणि + एवयण् इको यणचि (६.१.७७)
कर्मण्येवाधिकारस्तेएव + अधिकारःदीर्घ अकः सवर्णे दीर्घः (६.१.१०१)
कर्मण्येवाधिकारस्तेअधिकारः + तेविसर्ग → स् विसर्जनीयस्य सः (८.३.३४)

❖ समासः

  • अधिकार = अधिक + आर कर्मधारय (सम्भावित — पूर्वपद विशेषण)

ⓘ समास के खण्ड कोश से पहचाने गए हैं; विग्रह-वाक्य व समास-प्रकार (तत्पुरुष/बहुव्रीहि आदि) अर्थ पर निर्भर करता है।

❖ कृदन्तः

  • कर्मणि: कृ-मनिन् (कोश-व्युत्पत्ति)
  • अधिकारः: अधि+कृ+घञ् (कोश-व्युत्पत्ति)
  • फलेषु: फल्+अच् (कोश-व्युत्पत्ति)

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ३.० सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
💬 ज्योतिषीय प्रश्न पूछें