॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
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| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कर्मणि | कर्मन् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन |
| एव | अव्ययम् |
| अधिकारः | अधिकार (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
| ते | युष्मद् (त्रि.) — षष्ठी विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: युष्मद् (त्रि.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन | तद् (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, बहुवचन |
| मा | अव्ययम् |
| फलेषु | फल (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, बहुवचन |
| कदाचन | अव्ययम् |
कर्मणि ➤ कृत्य, कार्य, कर्म
संस्कृत: क्रिया · पर्याय: क्रिया, कृत्या, लीला
एव ➤ ठीक, बिल्कुल, सही तौर पर
अधिकारः ➤ अधीक्षण, देखभाल करना
संस्कृत: राज्ञां छत्रचामरादिव्यापारः · पर्याय: प्रक्रिया
ते ➤ तुम
संस्कृत: त्वम्
मा ➤ प्रतिषेधबोधक अव्यय, (नकारात्मक विरलतः) प्रायः लोट् लकार की क्रिया के साथ जुड़ा हुआ
फलेषु ➤ फल जैसे वृक्ष का
संस्कृत: वृक्षफलम्, वस्त्रयोनिः, फलकः, लाङ्गलस्याधस्थलोहकाष्ठम्, अधिकफलम्, सस्यहेतुकृतम् · पर्याय: सस्य
कदाचन ➤ किसी समय, एकदिन, एकबार, एकदफ़ा
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| कर्मन् |
क्रिया (३.२.१) — क्रिया क्रिया के नौ अर्थ (३.३.१६५) — आरम्भ, प्रायश्चित्त, शिक्षा, पूजा, विचार, उपाय, चेष्टा, चिकित्सा |
| अधिकार |
(छत्र-चँवर आदि राजसी) अधिकार (२.८.३१) — प्रक्रिया |
| फल |
वृक्ष का फल (२.४.१५) — सस्य हल का (लोहे का) फाल (२.९.१४) — निरीश, कुटक, फाल, कृषक |
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ⓘ यह अन्वय विभक्ति, पुरुष-वचन व वाक्य-क्रम के नियमों से स्वतः बना है — काव्यार्थ के लिए गुरु/टीका से अवश्य मिलाएँ।
कर्मणि = कृत्य · एव = ठीक · अधिकारः = अधीक्षण · ते = तुम · मा = प्रतिषेधबोधक अव्यय · फलेषु = फल जैसे वृक्ष का · कदाचन = किसी समय
| पदम् | विच्छेदः | सन्धि | सूत्रम् |
|---|---|---|---|
| कर्मण्येवाधिकारस्ते | कर्मणि + एव | यण् | इको यणचि (६.१.७७) |
| कर्मण्येवाधिकारस्ते | एव + अधिकारः | दीर्घ | अकः सवर्णे दीर्घः (६.१.१०१) |
| कर्मण्येवाधिकारस्ते | अधिकारः + ते | विसर्ग → स् | विसर्जनीयस्य सः (८.३.३४) |
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विश्लेषण-समय: ३.० सेकण्ड