२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
पुष् (पुषँ)
दिवादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 04.0079
धात्वर्थ: पुष्टौ — पालन करना, पोषण करना (to nurture, to nourish, to maintain,to promote,to bring up,to support)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुष्यति पुष्यतः पुष्यन्ति मध्यम पुष्यसि पुष्यथः पुष्यथ उत्तम पुष्यामि पुष्यावः पुष्यामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुष्यतात् / पुष्यताद् / पुष्यतु पुष्यताम् पुष्यन्तु मध्यम पुष्य / पुष्यतात् / पुष्यताद् पुष्यतम् पुष्यत उत्तम पुष्याणि पुष्याव पुष्याम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अपुष्यत् / अपुष्यद् अपुष्यताम् अपुष्यन् मध्यम अपुष्यः अपुष्यतम् अपुष्यत उत्तम अपुष्यम् अपुष्याव अपुष्याम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुष्येत् / पुष्येद् पुष्येताम् पुष्येयुः मध्यम पुष्येः पुष्येतम् पुष्येत उत्तम पुष्येयम् पुष्येव पुष्येम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पोक्ष्यति पोक्ष्यतः पोक्ष्यन्ति मध्यम पोक्ष्यसि पोक्ष्यथः पोक्ष्यथ उत्तम पोक्ष्यामि पोक्ष्यावः पोक्ष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पोष्टा पोष्टारौ पोष्टारः मध्यम पोष्टासि पोष्टास्थः पोष्टास्थ उत्तम पोष्टास्मि पोष्टास्वः पोष्टास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुपोष पुपुषतुः पुपुषुः मध्यम पुपोषिथ पुपुषथुः पुपुष उत्तम पुपोष पुपुषिव पुपुषिम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अपुषत् / अपुषद् अपुषताम् अपुषन् मध्यम अपुषः अपुषतम् अपुषत उत्तम अपुषम् अपुषाव अपुषाम
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुष्यात् / पुष्याद् पुष्यास्ताम् पुष्यासुः मध्यम पुष्याः पुष्यास्तम् पुष्यास्त उत्तम पुष्यासम् पुष्यास्व पुष्यास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अपोक्ष्यत् / अपोक्ष्यद् अपोक्ष्यताम् अपोक्ष्यन् मध्यम अपोक्ष्यः अपोक्ष्यतम् अपोक्ष्यत उत्तम अपोक्ष्यम् अपोक्ष्याव अपोक्ष्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुष्यते पुष्येते पुष्यन्ते मध्यम पुष्यसे पुष्येथे पुष्यध्वे उत्तम पुष्ये पुष्यावहे पुष्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुष्यताम् पुष्येताम् पुष्यन्ताम् मध्यम पुष्यस्व पुष्येथाम् पुष्यध्वम् उत्तम पुष्यै पुष्यावहै पुष्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अपुष्यत अपुष्येताम् अपुष्यन्त मध्यम अपुष्यथाः अपुष्येथाम् अपुष्यध्वम् उत्तम अपुष्ये अपुष्यावहि अपुष्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुष्येत पुष्येयाताम् पुष्येरन् मध्यम पुष्येथाः पुष्येयाथाम् पुष्येध्वम् उत्तम पुष्येय पुष्येवहि पुष्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पोक्ष्यते पोक्ष्येते पोक्ष्यन्ते मध्यम पोक्ष्यसे पोक्ष्येथे पोक्ष्यध्वे उत्तम पोक्ष्ये पोक्ष्यावहे पोक्ष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त पोषण — — पोषणम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त पोषक पोषकः पोषिका पोषकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त पोष्टृ पोष्टा पोष्ट्री पोष्टृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त पोष्य पोष्यः पोष्या पोष्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) पोष्टव्य पोष्टव्यः पोष्टव्या पोष्टव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त पोषणीय पोषणीयः पोषणीया पोषणीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) पुष्ट पुष्टः पुष्टा पुष्टम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) पुष्टवत् पुष्टवान् पुष्टवती पुष्टवत् / पुष्टवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) पुष्यत् पुष्यन् पुष्यन्ती पुष्यत् / पुष्यद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त पोक्ष्यत् पोक्ष्यन् पोक्ष्यती / पोक्ष्यन्ती पोक्ष्यत् / पोक्ष्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) पुष्ट्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रपुष्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) पोष्टुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय पोषम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त पोष पोषः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त पुष्टि — पुष्टिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त पुपुष्वस् पुपुष्वान् पुपुषुषी पुपुष्वत् / पुपुष्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।