२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
जुष् (जुषीँ)
तुदादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 06.0008
धात्वर्थ: प्रीतिसेवनयोः — सेवा करना, प्रसन्न होना, सन्तुष्ट करना (to serve, to please, to satisfy)
कर्तरि — आत्मनेपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जुषते जुषेते जुषन्ते मध्यम जुषसे जुषेथे जुषध्वे उत्तम जुषे जुषावहे जुषामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जुषताम् जुषेताम् जुषन्ताम् मध्यम जुषस्व जुषेथाम् जुषध्वम् उत्तम जुषै जुषावहै जुषामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अजुषत अजुषेताम् अजुषन्त मध्यम अजुषथाः अजुषेथाम् अजुषध्वम् उत्तम अजुषे अजुषावहि अजुषामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जुषेत जुषेयाताम् जुषेरन् मध्यम जुषेथाः जुषेयाथाम् जुषेध्वम् उत्तम जुषेय जुषेवहि जुषेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जोषिष्यते जोषिष्येते जोषिष्यन्ते मध्यम जोषिष्यसे जोषिष्येथे जोषिष्यध्वे उत्तम जोषिष्ये जोषिष्यावहे जोषिष्यामहे
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जोषिता जोषितारौ जोषितारः मध्यम जोषितासे जोषितासाथे जोषिताध्वे उत्तम जोषिताहे जोषितास्वहे जोषितास्महे
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जुजुषे जुजुषाते जुजुषिरे मध्यम जुजुषिषे जुजुषाथे जुजुषिध्वे उत्तम जुजुषे जुजुषिवहे जुजुषिमहे
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अजोषिष्ट अजोषिषाताम् अजोषिषत मध्यम अजोषिष्ठाः अजोषिषाथाम् अजोषिध्वम् उत्तम अजोषिषि अजोषिष्वहि अजोषिष्महि
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जोषिषीष्ट जोषिषीयास्ताम् जोषिषीरन् मध्यम जोषिषीष्ठाः जोषिषीयास्थाम् जोषिषीध्वम् उत्तम जोषिषीय जोषिषीवहि जोषिषीमहि
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अजोषिष्यत अजोषिष्येताम् अजोषिष्यन्त मध्यम अजोषिष्यथाः अजोषिष्येथाम् अजोषिष्यध्वम् उत्तम अजोषिष्ये अजोषिष्यावहि अजोषिष्यामहि
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जुष्यते जुष्येते जुष्यन्ते मध्यम जुष्यसे जुष्येथे जुष्यध्वे उत्तम जुष्ये जुष्यावहे जुष्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जुष्यताम् जुष्येताम् जुष्यन्ताम् मध्यम जुष्यस्व जुष्येथाम् जुष्यध्वम् उत्तम जुष्यै जुष्यावहै जुष्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अजुष्यत अजुष्येताम् अजुष्यन्त मध्यम अजुष्यथाः अजुष्येथाम् अजुष्यध्वम् उत्तम अजुष्ये अजुष्यावहि अजुष्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जुष्येत जुष्येयाताम् जुष्येरन् मध्यम जुष्येथाः जुष्येयाथाम् जुष्येध्वम् उत्तम जुष्येय जुष्येवहि जुष्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जोषिष्यते जोषिष्येते जोषिष्यन्ते मध्यम जोषिष्यसे जोषिष्येथे जोषिष्यध्वे उत्तम जोषिष्ये जोषिष्यावहे जोषिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त जोषण — — जोषणम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त जोषक जोषकः जोषिका जोषकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त जोषितृ जोषिता जोषित्री जोषितृ
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) जोषितव्य जोषितव्यः जोषितव्या जोषितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त जोषणीय जोषणीयः जोषणीया जोषणीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) जुष्ट जुष्टः जुष्टा जुष्टम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) जुष्टवत् जुष्टवान् जुष्टवती जुष्टवत् / जुष्टवद्
शानच् वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद) जुषमाण जुषमाणः जुषमाणा जुषमाणम्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) जुषित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रजुष्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) जोषितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय जोषम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त जोष जोषः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त जुष्टि — जुष्टिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त जुजुष्वस् जुजुष्वान् जुजुषुषी जुजुष्वत् / जुजुष्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।