२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
उम्भ् (उन्भँ)
तुदादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 06.0045
धात्वर्थ: पूरणे — भरना (to fill)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उम्भति उम्भतः उम्भन्ति मध्यम उम्भसि उम्भथः उम्भथ उत्तम उम्भामि उम्भावः उम्भामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उम्भतात् / उम्भताद् / उम्भतु उम्भताम् उम्भन्तु मध्यम उम्भ / उम्भतात् / उम्भताद् उम्भतम् उम्भत उत्तम उम्भानि उम्भाव उम्भाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम औम्भत् / औम्भद् औम्भताम् औम्भन् मध्यम औम्भः औम्भतम् औम्भत उत्तम औम्भम् औम्भाव औम्भाम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उम्भेत् / उम्भेद् उम्भेताम् उम्भेयुः मध्यम उम्भेः उम्भेतम् उम्भेत उत्तम उम्भेयम् उम्भेव उम्भेम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उम्भिष्यति उम्भिष्यतः उम्भिष्यन्ति मध्यम उम्भिष्यसि उम्भिष्यथः उम्भिष्यथ उत्तम उम्भिष्यामि उम्भिष्यावः उम्भिष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उम्भिता उम्भितारौ उम्भितारः मध्यम उम्भितासि उम्भितास्थः उम्भितास्थ उत्तम उम्भितास्मि उम्भितास्वः उम्भितास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उम्भाञ्चकार / उम्भामास / उम्भाम्बभूव उम्भाञ्चक्रतुः / उम्भामासतुः / उम्भाम्बभूवतुः उम्भाञ्चक्रुः / उम्भामासुः / उम्भाम्बभूवुः मध्यम उम्भाञ्चकर्थ / उम्भामासिथ / उम्भाम्बभूविथ उम्भाञ्चक्रथुः / उम्भामासथुः / उम्भाम्बभूवथुः उम्भाञ्चक्र / उम्भामास / उम्भाम्बभूव उत्तम उम्भाञ्चकर / उम्भाञ्चकार / उम्भामास / उम्भाम्बभूव उम्भाञ्चकृव / उम्भामासिव / उम्भाम्बभूविव उम्भाञ्चकृम / उम्भामासिम / उम्भाम्बभूविम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम औम्भीत् / औम्भीद् औम्भिष्टाम् औम्भिषुः मध्यम औम्भीः औम्भिष्टम् औम्भिष्ट उत्तम औम्भिषम् औम्भिष्व औम्भिष्म
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उभ्यात् / उभ्याद् उभ्यास्ताम् उभ्यासुः मध्यम उभ्याः उभ्यास्तम् उभ्यास्त उत्तम उभ्यासम् उभ्यास्व उभ्यास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम औम्भिष्यत् / औम्भिष्यद् औम्भिष्यताम् औम्भिष्यन् मध्यम औम्भिष्यः औम्भिष्यतम् औम्भिष्यत उत्तम औम्भिष्यम् औम्भिष्याव औम्भिष्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उभ्यते उभ्येते उभ्यन्ते मध्यम उभ्यसे उभ्येथे उभ्यध्वे उत्तम उभ्ये उभ्यावहे उभ्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उभ्यताम् उभ्येताम् उभ्यन्ताम् मध्यम उभ्यस्व उभ्येथाम् उभ्यध्वम् उत्तम उभ्यै उभ्यावहै उभ्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम औभ्यत औभ्येताम् औभ्यन्त मध्यम औभ्यथाः औभ्येथाम् औभ्यध्वम् उत्तम औभ्ये औभ्यावहि औभ्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उभ्येत उभ्येयाताम् उभ्येरन् मध्यम उभ्येथाः उभ्येयाथाम् उभ्येध्वम् उत्तम उभ्येय उभ्येवहि उभ्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम उम्भिष्यते उम्भिष्येते उम्भिष्यन्ते मध्यम उम्भिष्यसे उम्भिष्येथे उम्भिष्यध्वे उत्तम उम्भिष्ये उम्भिष्यावहे उम्भिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त उम्भन — — उम्भनम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त उम्भक उम्भकः उम्भिका उम्भकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त उम्भितृ उम्भिता उम्भित्री उम्भितृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त उम्भ्य उम्भ्यः उम्भ्या उम्भ्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) उम्भितव्य उम्भितव्यः उम्भितव्या उम्भितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त उम्भनीय उम्भनीयः उम्भनीया उम्भनीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) उभित उभितः उभिता उभितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) उभितवत् उभितवान् उभितवती उभितवत् / उभितवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) उम्भत् उम्भन् उम्भती / उम्भन्ती उम्भत् / उम्भद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त उम्भिष्यत् उम्भिष्यन् उम्भिष्यती / उम्भिष्यन्ती उम्भिष्यत् / उम्भिष्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) उम्भित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रोभ्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) उम्भितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय उम्भम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त उम्भ उम्भः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त उब्धि — उब्धिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त उम्भाम्बभूवस् उम्भाम्बभूवान् उम्भाम्बभूषी उम्भाम्बभूवत् / उम्भाम्बभूवद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।