२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
क्षि (क्षि)
तुदादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 06.0143
धात्वर्थ: निवासगत्योः — निवास करना, जाना (to dwell, to stay, to go)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षियति क्षियतः क्षियन्ति मध्यम क्षियसि क्षियथः क्षियथ उत्तम क्षियामि क्षियावः क्षियामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षियतात् / क्षियताद् / क्षियतु क्षियताम् क्षियन्तु मध्यम क्षिय / क्षियतात् / क्षियताद् क्षियतम् क्षियत उत्तम क्षियाणि क्षियाव क्षियाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अक्षियत् / अक्षियद् अक्षियताम् अक्षियन् मध्यम अक्षियः अक्षियतम् अक्षियत उत्तम अक्षियम् अक्षियाव अक्षियाम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षियेत् / क्षियेद् क्षियेताम् क्षियेयुः मध्यम क्षियेः क्षियेतम् क्षियेत उत्तम क्षियेयम् क्षियेव क्षियेम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षेष्यति क्षेष्यतः क्षेष्यन्ति मध्यम क्षेष्यसि क्षेष्यथः क्षेष्यथ उत्तम क्षेष्यामि क्षेष्यावः क्षेष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षेता क्षेतारौ क्षेतारः मध्यम क्षेतासि क्षेतास्थः क्षेतास्थ उत्तम क्षेतास्मि क्षेतास्वः क्षेतास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम चिक्षाय चिक्षियतुः चिक्षियुः मध्यम चिक्षयिथ / चिक्षेथ चिक्षियथुः चिक्षिय उत्तम चिक्षय / चिक्षाय चिक्षियिव चिक्षियिम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अक्षैषीत् / अक्षैषीद् अक्षैष्टाम् अक्षैषुः मध्यम अक्षैषीः अक्षैष्टम् अक्षैष्ट उत्तम अक्षैषम् अक्षैष्व अक्षैष्म
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षीयात् / क्षीयाद् क्षीयास्ताम् क्षीयासुः मध्यम क्षीयाः क्षीयास्तम् क्षीयास्त उत्तम क्षीयासम् क्षीयास्व क्षीयास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अक्षेष्यत् / अक्षेष्यद् अक्षेष्यताम् अक्षेष्यन् मध्यम अक्षेष्यः अक्षेष्यतम् अक्षेष्यत उत्तम अक्षेष्यम् अक्षेष्याव अक्षेष्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षीयते क्षीयेते क्षीयन्ते मध्यम क्षीयसे क्षीयेथे क्षीयध्वे उत्तम क्षीये क्षीयावहे क्षीयामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षीयताम् क्षीयेताम् क्षीयन्ताम् मध्यम क्षीयस्व क्षीयेथाम् क्षीयध्वम् उत्तम क्षीयै क्षीयावहै क्षीयामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अक्षीयत अक्षीयेताम् अक्षीयन्त मध्यम अक्षीयथाः अक्षीयेथाम् अक्षीयध्वम् उत्तम अक्षीये अक्षीयावहि अक्षीयामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षीयेत क्षीयेयाताम् क्षीयेरन् मध्यम क्षीयेथाः क्षीयेयाथाम् क्षीयेध्वम् उत्तम क्षीयेय क्षीयेवहि क्षीयेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्षायिष्यते / क्षेष्यते क्षायिष्येते / क्षेष्येते क्षायिष्यन्ते / क्षेष्यन्ते मध्यम क्षायिष्यसे / क्षेष्यसे क्षायिष्येथे / क्षेष्येथे क्षायिष्यध्वे / क्षेष्यध्वे उत्तम क्षायिष्ये / क्षेष्ये क्षायिष्यावहे / क्षेष्यावहे क्षायिष्यामहे / क्षेष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त क्षयण — — क्षयणम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त क्षायक क्षायकः क्षायिका क्षायकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त क्षेतृ क्षेता क्षेत्री क्षेतृ
यत् विध्यर्थक कृदन्त क्षेय क्षेयः क्षेया क्षेयम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) क्षेतव्य क्षेतव्यः क्षेतव्या क्षेतव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त क्षयणीय क्षयणीयः क्षयणीया क्षयणीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) क्षित क्षितः क्षिता क्षितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) क्षितवत् क्षितवान् क्षितवती क्षितवत् / क्षितवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) क्षियत् क्षियन् क्षियती / क्षियन्ती क्षियत् / क्षियद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त क्षेष्यत् क्षेष्यन् क्षेष्यती / क्षेष्यन्ती क्षेष्यत् / क्षेष्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) क्षित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रक्षित्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) क्षेतुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय क्षायम् — — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त क्षिति — क्षितिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त चिक्षिवस् चिक्षिवान् चिक्षुषी चिक्षिवत् / चिक्षिवद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।