२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
शुण्ठ् (शुठिँ)
चुरादिगण · उभयपदी · धातुपाठ 10.0147
धात्वर्थ: शोषणे — सूखना, सूखाना, शोषण करना (to dry,to become dry, to extract, to exploit)
कर्तरि — परस्मैपद कर्तरि — आत्मनेपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठति / शुण्ठयति शुण्ठतः / शुण्ठयतः शुण्ठन्ति / शुण्ठयन्ति मध्यम शुण्ठयसि / शुण्ठसि शुण्ठथः / शुण्ठयथः शुण्ठथ / शुण्ठयथ उत्तम शुण्ठयामि / शुण्ठामि शुण्ठयावः / शुण्ठावः शुण्ठयामः / शुण्ठामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठतात् / शुण्ठताद् / शुण्ठतु / शुण्ठयतात् / शुण्ठयताद् / शुण्ठयतु शुण्ठताम् / शुण्ठयताम् शुण्ठन्तु / शुण्ठयन्तु मध्यम शुण्ठ / शुण्ठतात् / शुण्ठताद् / शुण्ठय / शुण्ठयतात् / शुण्ठयताद् शुण्ठतम् / शुण्ठयतम् शुण्ठत / शुण्ठयत उत्तम शुण्ठयानि / शुण्ठानि शुण्ठयाव / शुण्ठाव शुण्ठयाम / शुण्ठाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठत् / अशुण्ठद् / अशुण्ठयत् / अशुण्ठयद् अशुण्ठताम् / अशुण्ठयताम् अशुण्ठन् / अशुण्ठयन् मध्यम अशुण्ठः / अशुण्ठयः अशुण्ठतम् / अशुण्ठयतम् अशुण्ठत / अशुण्ठयत उत्तम अशुण्ठम् / अशुण्ठयम् अशुण्ठयाव / अशुण्ठाव अशुण्ठयाम / अशुण्ठाम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयेत् / शुण्ठयेद् / शुण्ठेत् / शुण्ठेद् शुण्ठयेताम् / शुण्ठेताम् शुण्ठयेयुः / शुण्ठेयुः मध्यम शुण्ठयेः / शुण्ठेः शुण्ठयेतम् / शुण्ठेतम् शुण्ठयेत / शुण्ठेत उत्तम शुण्ठयेयम् / शुण्ठेयम् शुण्ठयेव / शुण्ठेव शुण्ठयेम / शुण्ठेम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयिष्यति / शुण्ठिष्यति शुण्ठयिष्यतः / शुण्ठिष्यतः शुण्ठयिष्यन्ति / शुण्ठिष्यन्ति मध्यम शुण्ठयिष्यसि / शुण्ठिष्यसि शुण्ठयिष्यथः / शुण्ठिष्यथः शुण्ठयिष्यथ / शुण्ठिष्यथ उत्तम शुण्ठयिष्यामि / शुण्ठिष्यामि शुण्ठयिष्यावः / शुण्ठिष्यावः शुण्ठयिष्यामः / शुण्ठिष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयिता / शुण्ठिता शुण्ठयितारौ / शुण्ठितारौ शुण्ठयितारः / शुण्ठितारः मध्यम शुण्ठयितासि / शुण्ठितासि शुण्ठयितास्थः / शुण्ठितास्थः शुण्ठयितास्थ / शुण्ठितास्थ उत्तम शुण्ठयितास्मि / शुण्ठितास्मि शुण्ठयितास्वः / शुण्ठितास्वः शुण्ठयितास्मः / शुण्ठितास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयाञ्चकार / शुण्ठयामास / शुण्ठयाम्बभूव / शुशुण्ठ शुण्ठयाञ्चक्रतुः / शुण्ठयामासतुः / शुण्ठयाम्बभूवतुः / शुशुण्ठतुः शुण्ठयाञ्चक्रुः / शुण्ठयामासुः / शुण्ठयाम्बभूवुः / शुशुण्ठुः मध्यम शुण्ठयाञ्चकर्थ / शुण्ठयामासिथ / शुण्ठयाम्बभूविथ / शुशुण्ठिथ शुण्ठयाञ्चक्रथुः / शुण्ठयामासथुः / शुण्ठयाम्बभूवथुः / शुशुण्ठथुः शुण्ठयाञ्चक्र / शुण्ठयामास / शुण्ठयाम्बभूव / शुशुण्ठ उत्तम शुण्ठयाञ्चकर / शुण्ठयाञ्चकार / शुण्ठयामास / शुण्ठयाम्बभूव / शुशुण्ठ शुण्ठयाञ्चकृव / शुण्ठयामासिव / शुण्ठयाम्बभूविव / शुशुण्ठिव शुण्ठयाञ्चकृम / शुण्ठयामासिम / शुण्ठयाम्बभूविम / शुशुण्ठिम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठीत् / अशुण्ठीद् / अशुशुण्ठत् / अशुशुण्ठद् अशुण्ठिष्टाम् / अशुशुण्ठताम् अशुण्ठिषुः / अशुशुण्ठन् मध्यम अशुण्ठीः / अशुशुण्ठः अशुण्ठिष्टम् / अशुशुण्ठतम् अशुण्ठिष्ट / अशुशुण्ठत उत्तम अशुण्ठिषम् / अशुशुण्ठम् अशुण्ठिष्व / अशुशुण्ठाव अशुण्ठिष्म / अशुशुण्ठाम
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठ्यात् / शुण्ठ्याद् शुण्ठ्यास्ताम् शुण्ठ्यासुः मध्यम शुण्ठ्याः शुण्ठ्यास्तम् शुण्ठ्यास्त उत्तम शुण्ठ्यासम् शुण्ठ्यास्व शुण्ठ्यास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठयिष्यत् / अशुण्ठयिष्यद् / अशुण्ठिष्यत् / अशुण्ठिष्यद् अशुण्ठयिष्यताम् / अशुण्ठिष्यताम् अशुण्ठयिष्यन् / अशुण्ठिष्यन् मध्यम अशुण्ठयिष्यः / अशुण्ठिष्यः अशुण्ठयिष्यतम् / अशुण्ठिष्यतम् अशुण्ठयिष्यत / अशुण्ठिष्यत उत्तम अशुण्ठयिष्यम् / अशुण्ठिष्यम् अशुण्ठयिष्याव / अशुण्ठिष्याव अशुण्ठयिष्याम / अशुण्ठिष्याम
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयते शुण्ठयेते शुण्ठयन्ते मध्यम शुण्ठयसे शुण्ठयेथे शुण्ठयध्वे उत्तम शुण्ठये शुण्ठयावहे शुण्ठयामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयताम् शुण्ठयेताम् शुण्ठयन्ताम् मध्यम शुण्ठयस्व शुण्ठयेथाम् शुण्ठयध्वम् उत्तम शुण्ठयै शुण्ठयावहै शुण्ठयामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठयत अशुण्ठयेताम् अशुण्ठयन्त मध्यम अशुण्ठयथाः अशुण्ठयेथाम् अशुण्ठयध्वम् उत्तम अशुण्ठये अशुण्ठयावहि अशुण्ठयामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयेत शुण्ठयेयाताम् शुण्ठयेरन् मध्यम शुण्ठयेथाः शुण्ठयेयाथाम् शुण्ठयेध्वम् उत्तम शुण्ठयेय शुण्ठयेवहि शुण्ठयेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयिष्यते शुण्ठयिष्येते शुण्ठयिष्यन्ते मध्यम शुण्ठयिष्यसे शुण्ठयिष्येथे शुण्ठयिष्यध्वे उत्तम शुण्ठयिष्ये शुण्ठयिष्यावहे शुण्ठयिष्यामहे
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयिता शुण्ठयितारौ शुण्ठयितारः मध्यम शुण्ठयितासे शुण्ठयितासाथे शुण्ठयिताध्वे उत्तम शुण्ठयिताहे शुण्ठयितास्वहे शुण्ठयितास्महे
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयाञ्चक्रे / शुण्ठयामास / शुण्ठयाम्बभूव शुण्ठयाञ्चक्राते / शुण्ठयामासतुः / शुण्ठयाम्बभूवतुः शुण्ठयाञ्चक्रिरे / शुण्ठयामासुः / शुण्ठयाम्बभूवुः मध्यम शुण्ठयाञ्चकृषे / शुण्ठयामासिथ / शुण्ठयाम्बभूविथ शुण्ठयाञ्चक्राथे / शुण्ठयामासथुः / शुण्ठयाम्बभूवथुः शुण्ठयाञ्चकृढ्वे / शुण्ठयामास / शुण्ठयाम्बभूव उत्तम शुण्ठयाञ्चक्रे / शुण्ठयामास / शुण्ठयाम्बभूव शुण्ठयाञ्चकृवहे / शुण्ठयामासिव / शुण्ठयाम्बभूविव शुण्ठयाञ्चकृमहे / शुण्ठयामासिम / शुण्ठयाम्बभूविम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुशुण्ठत अशुशुण्ठेताम् अशुशुण्ठन्त मध्यम अशुशुण्ठथाः अशुशुण्ठेथाम् अशुशुण्ठध्वम् उत्तम अशुशुण्ठे अशुशुण्ठावहि अशुशुण्ठामहि
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयिषीष्ट शुण्ठयिषीयास्ताम् शुण्ठयिषीरन् मध्यम शुण्ठयिषीष्ठाः शुण्ठयिषीयास्थाम् शुण्ठयिषीढ्वम् / शुण्ठयिषीध्वम् उत्तम शुण्ठयिषीय शुण्ठयिषीवहि शुण्ठयिषीमहि
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठयिष्यत अशुण्ठयिष्येताम् अशुण्ठयिष्यन्त मध्यम अशुण्ठयिष्यथाः अशुण्ठयिष्येथाम् अशुण्ठयिष्यध्वम् उत्तम अशुण्ठयिष्ये अशुण्ठयिष्यावहि अशुण्ठयिष्यामहि
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठ्यते शुण्ठ्येते शुण्ठ्यन्ते मध्यम शुण्ठ्यसे शुण्ठ्येथे शुण्ठ्यध्वे उत्तम शुण्ठ्ये शुण्ठ्यावहे शुण्ठ्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठ्यताम् शुण्ठ्येताम् शुण्ठ्यन्ताम् मध्यम शुण्ठ्यस्व शुण्ठ्येथाम् शुण्ठ्यध्वम् उत्तम शुण्ठ्यै शुण्ठ्यावहै शुण्ठ्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठ्यत अशुण्ठ्येताम् अशुण्ठ्यन्त मध्यम अशुण्ठ्यथाः अशुण्ठ्येथाम् अशुण्ठ्यध्वम् उत्तम अशुण्ठ्ये अशुण्ठ्यावहि अशुण्ठ्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठ्येत शुण्ठ्येयाताम् शुण्ठ्येरन् मध्यम शुण्ठ्येथाः शुण्ठ्येयाथाम् शुण्ठ्येध्वम् उत्तम शुण्ठ्येय शुण्ठ्येवहि शुण्ठ्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठयिष्यते / शुण्ठिष्यते शुण्ठयिष्येते / शुण्ठिष्येते शुण्ठयिष्यन्ते / शुण्ठिष्यन्ते मध्यम शुण्ठयिष्यसे / शुण्ठिष्यसे शुण्ठयिष्येथे / शुण्ठिष्येथे शुण्ठयिष्यध्वे / शुण्ठिष्यध्वे उत्तम शुण्ठयिष्ये / शुण्ठिष्ये शुण्ठयिष्यावहे / शुण्ठिष्यावहे शुण्ठयिष्यामहे / शुण्ठिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त शुण्ठन — — शुण्ठनम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त शुण्ठक शुण्ठकः शुण्ठिका शुण्ठकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त शुण्ठितृ शुण्ठिता शुण्ठित्री शुण्ठितृ
यत् विध्यर्थक कृदन्त शुण्ठ्य शुण्ठ्यः शुण्ठ्या शुण्ठ्यम्
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त शुण्ठ्य शुण्ठ्यः शुण्ठ्या शुण्ठ्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) शुण्ठितव्य शुण्ठितव्यः शुण्ठितव्या शुण्ठितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त शुण्ठनीय शुण्ठनीयः शुण्ठनीया शुण्ठनीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) शुण्ठित शुण्ठितः शुण्ठिता शुण्ठितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) शुण्ठितवत् शुण्ठितवान् शुण्ठितवती शुण्ठितवत् / शुण्ठितवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) शुण्ठत् शुण्ठन् शुण्ठन्ती शुण्ठत् / शुण्ठद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त शुण्ठिष्यत् शुण्ठिष्यन् शुण्ठिष्यती / शुण्ठिष्यन्ती शुण्ठिष्यत् / शुण्ठिष्यद्
शानच् वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद) शुण्ठयमान शुण्ठयमानः शुण्ठयमाना शुण्ठयमानम्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) शुण्ठित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रशुण्ठ्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) शुण्ठितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय शुण्ठम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त शुण्ठ शुण्ठः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त शुण्टि — शुण्टिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त शुशुण्ठ्वस् शुशुण्ठ्वान् शुशुण्ठुषी शुशुण्ठ्वत् / शुशुण्ठ्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।