२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
शुच् (शुचँ)
भ्वादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 01.0210
धात्वर्थ: शोके — चिन्ता करना, शोक करना (to worry, to sorrow, to grieve)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोचति शोचतः शोचन्ति मध्यम शोचसि शोचथः शोचथ उत्तम शोचामि शोचावः शोचामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोचतात् / शोचताद् / शोचतु शोचताम् शोचन्तु मध्यम शोच / शोचतात् / शोचताद् शोचतम् शोचत उत्तम शोचानि शोचाव शोचाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशोचत् / अशोचद् अशोचताम् अशोचन् मध्यम अशोचः अशोचतम् अशोचत उत्तम अशोचम् अशोचाव अशोचाम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोचेत् / शोचेद् शोचेताम् शोचेयुः मध्यम शोचेः शोचेतम् शोचेत उत्तम शोचेयम् शोचेव शोचेम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोचिष्यति शोचिष्यतः शोचिष्यन्ति मध्यम शोचिष्यसि शोचिष्यथः शोचिष्यथ उत्तम शोचिष्यामि शोचिष्यावः शोचिष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोचिता शोचितारौ शोचितारः मध्यम शोचितासि शोचितास्थः शोचितास्थ उत्तम शोचितास्मि शोचितास्वः शोचितास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुशोच शुशुचतुः शुशुचुः मध्यम शुशोचिथ शुशुचथुः शुशुच उत्तम शुशोच शुशुचिव शुशुचिम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशोचीत् / अशोचीद् अशोचिष्टाम् अशोचिषुः मध्यम अशोचीः अशोचिष्टम् अशोचिष्ट उत्तम अशोचिषम् अशोचिष्व अशोचिष्म
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुच्यात् / शुच्याद् शुच्यास्ताम् शुच्यासुः मध्यम शुच्याः शुच्यास्तम् शुच्यास्त उत्तम शुच्यासम् शुच्यास्व शुच्यास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशोचिष्यत् / अशोचिष्यद् अशोचिष्यताम् अशोचिष्यन् मध्यम अशोचिष्यः अशोचिष्यतम् अशोचिष्यत उत्तम अशोचिष्यम् अशोचिष्याव अशोचिष्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुच्यते शुच्येते शुच्यन्ते मध्यम शुच्यसे शुच्येथे शुच्यध्वे उत्तम शुच्ये शुच्यावहे शुच्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुच्यताम् शुच्येताम् शुच्यन्ताम् मध्यम शुच्यस्व शुच्येथाम् शुच्यध्वम् उत्तम शुच्यै शुच्यावहै शुच्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुच्यत अशुच्येताम् अशुच्यन्त मध्यम अशुच्यथाः अशुच्येथाम् अशुच्यध्वम् उत्तम अशुच्ये अशुच्यावहि अशुच्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुच्येत शुच्येयाताम् शुच्येरन् मध्यम शुच्येथाः शुच्येयाथाम् शुच्येध्वम् उत्तम शुच्येय शुच्येवहि शुच्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोचिष्यते शोचिष्येते शोचिष्यन्ते मध्यम शोचिष्यसे शोचिष्येथे शोचिष्यध्वे उत्तम शोचिष्ये शोचिष्यावहे शोचिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त शोचन — — शोचनम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त शोचक शोचकः शोचिका शोचकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त शोचितृ शोचिता शोचित्री शोचितृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त शोच्य शोच्यः शोच्या शोच्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) शोचितव्य शोचितव्यः शोचितव्या शोचितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त शोचनीय शोचनीयः शोचनीया शोचनीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) शुचित शुचितः शुचिता शुचितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) शुचितवत् शुचितवान् शुचितवती शुचितवत् / शुचितवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) शोचत् शोचन् शोचन्ती शोचत् / शोचद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त शोचिष्यत् शोचिष्यन् शोचिष्यती / शोचिष्यन्ती शोचिष्यत् / शोचिष्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) शुचित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रशुच्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) शोचितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय शोचम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त शोक शोकः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त शुक्ति — शुक्तिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त शुशुच्वस् शुशुच्वान् शुशुचुषी शुशुच्वत् / शुशुच्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।