२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
शुण्ठ् (शुठिँ)
भ्वादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 01.0399
धात्वर्थ: शोषणे — सूखना, सुखाना (to dry,to become dry)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठति शुण्ठतः शुण्ठन्ति मध्यम शुण्ठसि शुण्ठथः शुण्ठथ उत्तम शुण्ठामि शुण्ठावः शुण्ठामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठतात् / शुण्ठताद् / शुण्ठतु शुण्ठताम् शुण्ठन्तु मध्यम शुण्ठ / शुण्ठतात् / शुण्ठताद् शुण्ठतम् शुण्ठत उत्तम शुण्ठानि शुण्ठाव शुण्ठाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठत् / अशुण्ठद् अशुण्ठताम् अशुण्ठन् मध्यम अशुण्ठः अशुण्ठतम् अशुण्ठत उत्तम अशुण्ठम् अशुण्ठाव अशुण्ठाम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठेत् / शुण्ठेद् शुण्ठेताम् शुण्ठेयुः मध्यम शुण्ठेः शुण्ठेतम् शुण्ठेत उत्तम शुण्ठेयम् शुण्ठेव शुण्ठेम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठिष्यति शुण्ठिष्यतः शुण्ठिष्यन्ति मध्यम शुण्ठिष्यसि शुण्ठिष्यथः शुण्ठिष्यथ उत्तम शुण्ठिष्यामि शुण्ठिष्यावः शुण्ठिष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठिता शुण्ठितारौ शुण्ठितारः मध्यम शुण्ठितासि शुण्ठितास्थः शुण्ठितास्थ उत्तम शुण्ठितास्मि शुण्ठितास्वः शुण्ठितास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुशुण्ठ शुशुण्ठतुः शुशुण्ठुः मध्यम शुशुण्ठिथ शुशुण्ठथुः शुशुण्ठ उत्तम शुशुण्ठ शुशुण्ठिव शुशुण्ठिम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठीत् / अशुण्ठीद् अशुण्ठिष्टाम् अशुण्ठिषुः मध्यम अशुण्ठीः अशुण्ठिष्टम् अशुण्ठिष्ट उत्तम अशुण्ठिषम् अशुण्ठिष्व अशुण्ठिष्म
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठ्यात् / शुण्ठ्याद् शुण्ठ्यास्ताम् शुण्ठ्यासुः मध्यम शुण्ठ्याः शुण्ठ्यास्तम् शुण्ठ्यास्त उत्तम शुण्ठ्यासम् शुण्ठ्यास्व शुण्ठ्यास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठिष्यत् / अशुण्ठिष्यद् अशुण्ठिष्यताम् अशुण्ठिष्यन् मध्यम अशुण्ठिष्यः अशुण्ठिष्यतम् अशुण्ठिष्यत उत्तम अशुण्ठिष्यम् अशुण्ठिष्याव अशुण्ठिष्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठ्यते शुण्ठ्येते शुण्ठ्यन्ते मध्यम शुण्ठ्यसे शुण्ठ्येथे शुण्ठ्यध्वे उत्तम शुण्ठ्ये शुण्ठ्यावहे शुण्ठ्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठ्यताम् शुण्ठ्येताम् शुण्ठ्यन्ताम् मध्यम शुण्ठ्यस्व शुण्ठ्येथाम् शुण्ठ्यध्वम् उत्तम शुण्ठ्यै शुण्ठ्यावहै शुण्ठ्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुण्ठ्यत अशुण्ठ्येताम् अशुण्ठ्यन्त मध्यम अशुण्ठ्यथाः अशुण्ठ्येथाम् अशुण्ठ्यध्वम् उत्तम अशुण्ठ्ये अशुण्ठ्यावहि अशुण्ठ्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठ्येत शुण्ठ्येयाताम् शुण्ठ्येरन् मध्यम शुण्ठ्येथाः शुण्ठ्येयाथाम् शुण्ठ्येध्वम् उत्तम शुण्ठ्येय शुण्ठ्येवहि शुण्ठ्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुण्ठिष्यते शुण्ठिष्येते शुण्ठिष्यन्ते मध्यम शुण्ठिष्यसे शुण्ठिष्येथे शुण्ठिष्यध्वे उत्तम शुण्ठिष्ये शुण्ठिष्यावहे शुण्ठिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त शुण्ठन — — शुण्ठनम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त शुण्ठक शुण्ठकः शुण्ठिका शुण्ठकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त शुण्ठितृ शुण्ठिता शुण्ठित्री शुण्ठितृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त शुण्ठ्य शुण्ठ्यः शुण्ठ्या शुण्ठ्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) शुण्ठितव्य शुण्ठितव्यः शुण्ठितव्या शुण्ठितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त शुण्ठनीय शुण्ठनीयः शुण्ठनीया शुण्ठनीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) शुण्ठित शुण्ठितः शुण्ठिता शुण्ठितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) शुण्ठितवत् शुण्ठितवान् शुण्ठितवती शुण्ठितवत् / शुण्ठितवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) शुण्ठत् शुण्ठन् शुण्ठन्ती शुण्ठत् / शुण्ठद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त शुण्ठिष्यत् शुण्ठिष्यन् शुण्ठिष्यती / शुण्ठिष्यन्ती शुण्ठिष्यत् / शुण्ठिष्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) शुण्ठित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रशुण्ठ्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) शुण्ठितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय शुण्ठम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त शुण्ठ शुण्ठः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त शुण्टि — शुण्टिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त शुशुण्ठ्वस् शुशुण्ठ्वान् शुशुण्ठुषी शुशुण्ठ्वत् / शुशुण्ठ्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।