२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
प्लेव् (प्लेवृँ)
भ्वादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 01.0582
धात्वर्थ: सेवने (to serve, to devote oneself, practise)
कर्तरि — आत्मनेपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेवते प्लेवेते प्लेवन्ते मध्यम प्लेवसे प्लेवेथे प्लेवध्वे उत्तम प्लेवे प्लेवावहे प्लेवामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेवताम् प्लेवेताम् प्लेवन्ताम् मध्यम प्लेवस्व प्लेवेथाम् प्लेवध्वम् उत्तम प्लेवै प्लेवावहै प्लेवामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अप्लेवत अप्लेवेताम् अप्लेवन्त मध्यम अप्लेवथाः अप्लेवेथाम् अप्लेवध्वम् उत्तम अप्लेवे अप्लेवावहि अप्लेवामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेवेत प्लेवेयाताम् प्लेवेरन् मध्यम प्लेवेथाः प्लेवेयाथाम् प्लेवेध्वम् उत्तम प्लेवेय प्लेवेवहि प्लेवेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेविष्यते प्लेविष्येते प्लेविष्यन्ते मध्यम प्लेविष्यसे प्लेविष्येथे प्लेविष्यध्वे उत्तम प्लेविष्ये प्लेविष्यावहे प्लेविष्यामहे
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेविता प्लेवितारौ प्लेवितारः मध्यम प्लेवितासे प्लेवितासाथे प्लेविताध्वे उत्तम प्लेविताहे प्लेवितास्वहे प्लेवितास्महे
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पिप्लेवे पिप्लेवाते पिप्लेविरे मध्यम पिप्लेविषे पिप्लेवाथे पिप्लेविढ्वे / पिप्लेविध्वे उत्तम पिप्लेवे पिप्लेविवहे पिप्लेविमहे
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अप्लेविष्ट अप्लेविषाताम् अप्लेविषत मध्यम अप्लेविष्ठाः अप्लेविषाथाम् अप्लेविढ्वम् / अप्लेविध्वम् उत्तम अप्लेविषि अप्लेविष्वहि अप्लेविष्महि
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेविषीष्ट प्लेविषीयास्ताम् प्लेविषीरन् मध्यम प्लेविषीष्ठाः प्लेविषीयास्थाम् प्लेविषीढ्वम् / प्लेविषीध्वम् उत्तम प्लेविषीय प्लेविषीवहि प्लेविषीमहि
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अप्लेविष्यत अप्लेविष्येताम् अप्लेविष्यन्त मध्यम अप्लेविष्यथाः अप्लेविष्येथाम् अप्लेविष्यध्वम् उत्तम अप्लेविष्ये अप्लेविष्यावहि अप्लेविष्यामहि
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेव्यते प्लेव्येते प्लेव्यन्ते मध्यम प्लेव्यसे प्लेव्येथे प्लेव्यध्वे उत्तम प्लेव्ये प्लेव्यावहे प्लेव्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेव्यताम् प्लेव्येताम् प्लेव्यन्ताम् मध्यम प्लेव्यस्व प्लेव्येथाम् प्लेव्यध्वम् उत्तम प्लेव्यै प्लेव्यावहै प्लेव्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अप्लेव्यत अप्लेव्येताम् अप्लेव्यन्त मध्यम अप्लेव्यथाः अप्लेव्येथाम् अप्लेव्यध्वम् उत्तम अप्लेव्ये अप्लेव्यावहि अप्लेव्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेव्येत प्लेव्येयाताम् प्लेव्येरन् मध्यम प्लेव्येथाः प्लेव्येयाथाम् प्लेव्येध्वम् उत्तम प्लेव्येय प्लेव्येवहि प्लेव्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम प्लेविष्यते प्लेविष्येते प्लेविष्यन्ते मध्यम प्लेविष्यसे प्लेविष्येथे प्लेविष्यध्वे उत्तम प्लेविष्ये प्लेविष्यावहे प्लेविष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त प्लेवन — — प्लेवनम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त प्लेवक प्लेवकः प्लेविका प्लेवकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त प्लेवितृ प्लेविता प्लेवित्री प्लेवितृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त प्लेव्य प्लेव्यः प्लेव्या प्लेव्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) प्लेवितव्य प्लेवितव्यः प्लेवितव्या प्लेवितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त प्लेवनीय प्लेवनीयः प्लेवनीया प्लेवनीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) प्लेवित प्लेवितः प्लेविता प्लेवितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) प्लेवितवत् प्लेवितवान् प्लेवितवती प्लेवितवत् / प्लेवितवद्
शानच् वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद) प्लेवमान प्लेवमानः प्लेवमाना प्लेवमानम्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) प्लेवित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रप्लेव्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) प्लेवितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय प्लेवम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त प्लेव प्लेवः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त प्लयूति — प्लयूतिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त पिप्लेवस् पिप्लेवान् पिप्लयुषी पिप्लेवत् / पिप्लेवद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।